संस्कृत चित्र-वर्णन कक्षा 6 एवं 7

संस्कृत चित्र-वर्णन कक्षा 6 एवं 7 के पाठ्यक्रम का एक अभिन्न भाग है। इसमें एक सरल चित्र देकर उसके विषय में संस्कृत भाषा में तीन से पाँच वाक्य लिखने के लिए कहा जाता है। इसके लिए एक मञ्दजूषा में कुछ पद दिए जाते हैं, जिनमें से पद लेकर वाक्य बनाया जाता है। कुछ विद्यालयों में वाक्य में खाली स्थान दिया जाता है, जिन्हें मञ्जूषा से पद छाँटकर पूरा करना होता है।

चित्र-वर्णन में वाक्य बनाते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

  1. सबसे पहले चित्र को ध्यान से देखें कि वह किससे सम्बन्धित है।
  2. पहले वाक्य में चित्र किस बारे में यह बताएँ। इसके लिए “एतत्/इदम् (शब्द + षष्ठी विभक्ति) अस्ति” इस वाक्य का प्रयोग करें।
  3. मञ्जूषा में सबसे पहले क्रियाएँ ढूंढे, फिर देखें कि वह क्रिया किस कर्ता के साथ सटीक बैठती है। ध्यान रखें कि जिस पुरुष और वचन में क्रिया होगी, उसी पुरुष और वचन में कर्ता भी होना चाहिए।
  4. वाक्य सरल और छोटे रखें। बड़े वाक्य बनाने से बचें।
  5. प्रयास करें कि वाक्यों में मञ्जूषा में दिए गए पदों का प्रयोग हो।

नीचे संस्कृत चित्र-वर्णन कक्षा 6 एवं 7 के दो अभ्यास हिन्दी अनुवाद के साथ दिए गए हैं। छात्र इसे देखकर अभ्यास कर सकते हैं।

संस्कृत चित्र-वर्णन कक्षा 6-7

  • चित्र-वर्णन

(चित्रं दृष्ट्वा कोष्ठके प्रदत्तपदैः वाक्यानि पूरयत)

(चित्रम्, उद्यानम्, पठन्ति, वृक्षाः, पुष्पाणि, बालिका )

(क) एतत् विद्यालयस्य ____ अस्ति। (यह विद्यालय का चित्र है।)

(ख) बालकः ____ बालिका च विद्यालयं गच्छतः। (लड़के-लडकियाँ विद्यालय जा रहे हैं।)

(ग) विद्यालये छात्राः ____। (विद्यालय में अनेक छात्र पढ़ते हैं।)

(घ) विद्यालयस्य पुरतः _____ अस्ति। (विद्यालय के सामने उद्यान है।)

(ङ)उद्याने _____ ______ च सन्ति। (उद्यान में अनेक पेड़ और बहुत से फूल हैं।)

उत्तराणि- (क) चित्रम्, (ख) बालिका, (ग) पठन्ति, (घ) उद्यानम्, (ङ) वृक्षाः पुष्पाणि

(2) चित्र-वर्णन

(चित्रं दृष्ट्वा कोष्ठके प्रदत्तपदैः वाक्यानि पूरयत)

संस्कृत चित्रवर्णन

(नौका, वृक्षाः, नदी, खगाः, मेघाः)

क- एका _ _ _ वहति। (एक नदी बह रही है।)

ख- चित्रे एका _ _ _ तरति। (चित्र में एक नाव तैर रही है।)

ग- चित्रे बहवः _ _ _ सन्ति। (चित्र में बहुत से पेड़ हैं।)

घ- आकाशे _ _ _ सन्ति। (आकाश में बहुत से बादल हैं।)

ङ_ _ _ उत्पतन्ति। (बहुत से पक्षी उड़ रहे हैं।)

उत्तराणि- क- नदी, ख- नौका, ग- वृक्षाः, घ- मेघाः, ङ- उत्पतन्ति

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