CBSE Class 9 & 10 Sanskrit – चित्रवर्णनम्
कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए संस्कृत एक ऐसा विषय है, जिसमें थोड़ा परिश्रम करने पर पूर्णांक आ सकते हैं। इन कक्षाओं के पाठ्यक्रम में संस्कृत चित्र-वर्णन एक मुख्य टॉपिक है। प्रश्नपत्र में यह टॉपिक 5 अंकों का होता है।
इसके अंतर्गत एक चित्र दिया जाता है। इससे सलंग्न मञ्जूषा में चित्र से सम्बन्धित शब्द दिए गए होते हैं। इन्हीं शब्दों की सहायता से विद्यार्थियों को संस्कृत चित्र-वर्णन करना होता है। यहाँ वाक्य-निर्माण स्वयं करना पड़ता है। इसलिए विद्यार्थी कठिनाई का अनुभव करते हैं। यदि विद्यार्थी कुछ बातों का ध्यान रखें, तो संस्कृत चित्र-वर्णन आसानी से कर सकते हैं।
इस पोस्ट में कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों के स्तर को ध्यान में रखते हुए कुछ चित्रों के उदाहरण दिए गए हैं। ये चित्र समुद्र तट, गणतंत्र दिवस, ताजमहल और पुस्तकालय हैं। ये परीक्षा में अक्सर आने वाले चित्र हैं। चित्रों के साथ मञ्जूषा और कुछ सरल वाक्य-निर्माण भी दिए गए हैं। इससे विद्यार्थी आसानी से चित्र देखकर अभ्यास कर सकते हैं।
चित्र, मञ्जूषा और वाक्यों के साथ कुछ आसान टिप्स और ट्रिक्स भी हैं। इससे छात्रों को स्वयं वाक्य-निर्माण करने में आसानी होगी।
संस्कृत चित्र-वर्णन में ध्यान देने योग्य तथ्य
संस्कृत चित्र-वर्णन कक्षा १० के विद्यार्थियों के लिए कुछ नियमों और निर्देशों का पालन करने पर बहुत आसान हो जाएगा। इनमें कुछ बातें तो वही हैं, जो कक्षा ८ के विद्यार्थियों के लिए पिछली पोस्ट में बतायी गयी हैं-
लट् लकार का प्रयोग
संस्कृत चित्र-वर्णन में लट् लकार का प्रयोग किया जाता है। इसका कारण है कि छात्रों को चित्र देखकर उसका वर्णन करना होता है, जो वर्तमान काल में होता है। इसलिए लट् लकार की क्रिया का प्रयोग करना चाहिए। क्रियापद प्रायः मञ्जूषा में दिये होते हैं। आपको बस उन्हें पहचानना होता है। यदि क्रिया पद न दिए हों, तो कर्ता के वचन के अनुसार क्रिया पद बना लीजिए।
प्रथम पुरुष के कर्ता का प्रयोग
संस्कृत चित्र वर्णन में प्रथम पुरुष के कर्ता का प्रयोग करना चाहिए। आपको पता है कि संस्कृत में प्रथम पुरुष का कर्ता वह होता है, जिसके बारे में बात की जा रही हो। चित्र-वर्णन में भी छात्र किसी का वर्णन करते हैं। इसलिए प्रथम पुरुष का कर्ता और उसके अनुसार प्रथम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होता है।
कर्ता-क्रिया सम्बन्ध का ध्यान
वाक्य बनाते समय कर्ता-क्रिया सम्बन्ध का ध्यान रखना चाहिए। जिस पुरुष और वचन में कर्ता होता है, उसी पुरुष वचन में क्रिया भी होनी चाहिए। संस्कृत चित्र-वर्णन में प्रथम पुरुष के कर्ता का प्रयोग होता है, इसलिए क्रिया भी प्रथम पुरुष में ही होगी। आपको है वचन पर अधिक ध्यान देना है। संस्कृत में तीन वचन होते हैं, तो कर्ता के एकवचन, द्विवचन या बहुवचन के अनुसार क्रिया भी होगी।
मञ्जूषा के शब्दों का अधिकाधिक प्रयोग
मञ्जूषा के शब्दों का अधिक से अधिक प्रयोग। यद्यपि आप कुछ क्रिया पद स्वयं भी बना सकते हैं, तथापि आपसे अपेक्षा की जाती है कि मञ्जूषा के शब्दों का पूरा प्रयोग करें।
विशेषणों का उचित प्रयोग
इस बात का ध्यान रखें कि मञ्जूषा में अक्सर विशेषण तथा अन्य विभक्तियों के पद भी दिए होते हैं। आपको यह देखना होगा कि कौन सा विशेषण किस विशेष्य के साथ सटीक बैठता है। उदाहरण के लिए यदि किसी चित्र में फूल और पेड़ आदि दिए गये हैं। मञ्जूषा में ‘सुन्दराणि’ और विशालाः’ विशेषण दिये गये हैं। यहाँ आपको समझ जाना चाहिए कि ‘सुन्दराणि’ विशेषण पुष्पाणि के साथ और ‘विशालाः’ विशेषण वृक्षाः पद के साथ लगेगा।
कुछ नमूने (sample) वाक्यों का प्रयोग
संस्कृत चित्र-वर्णन में कुछ वाक्य पहले से तैयार करके उनमें कुछ शब्द डालकर नया वाक्य बनाया जा सकता है। जैसे यदि किसी विद्यालय का चित्र हो, तो पहला वाक्य होगा- “एतत्/इदम् विद्यालयस्य चित्रम् अस्ति।” यदि उद्यान का चित्र हो, तो बस विद्यालय के स्थान पर उद्यान शब्द की षष्ठी विभक्ति का प्रयोग कर देंगे।
इसी प्रकार अन्य वाक्यों का आरम्भ “अस्मिन् चित्रे” से कर सकते हैं। जिस स्थान का चित्र हो उसे सप्तमी विभक्ति में रखकर भी वाक्य बनाया जा सकता है जैसे “अस्मिन् विद्यालये।” इसके बाद कर्ता और क्रिया का उपयोग करके सरल वाक्य बनाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि विद्यालय का चित्र है तो “अस्मिन् विद्यालये एकः पुस्तकालयः अस्ति।”
उपर्युक्त बातों का ध्यान रखकर विद्यार्थी संस्कृत चित्र-वर्णन में सरल और व्याकरण की दृष्टि से सही वाक्य बनाकर पूर्णांक प्राप्त कर सकते हैं।
प्रथमं चित्र-वर्णनम् (समुद्रतट: )Sanskrit Chitra Varnan

मञ्जूषा
(समुद्रतटस्य, बालुकागृहम्, क्रीडन्ति, जलविहारम्, तरङ्गाः, वृक्षाः, छत्रम्, जलपोतः, पश्यतः, जनाः, बालाः, आनन्दम्।)
चित्र वर्णन के सरल वाक्य (हिन्दी अनुवाद सहित):
- इदम् एकस्य समुद्रतटस्य चित्रम् अस्ति।
(यह चित्र एक समुद्र तट का है।) - तटे केचन बालाः सिकताभिः बालुकागृहम् रचयन्ति।
(किनारे पर कुछ बच्चे रेत से मिट्टी का घर बना रहे हैं।) - अन्ये बालकाः समुद्रे तरन्ति जलविहारम् च कुर्वन्ति।
(दूसरे बच्चे समुद्र में तैर रहे हैं और जलविहार कर रहे हैं।) - तटे एकं छत्रं अस्ति, यत्र माता-पिता उपविश्य बालान् पश्यतः।
(तट पर एक छतरी है, जहाँ माता-पिता बैठकर बच्चों को देख रहे हैं।) - समुद्रजले एकः विशालः जलपोतः अपि दृश्यते।
(समुद्र के पानी में एक बड़ा जहाज भी दिखाई दे रहा है।) - तटस्य समीपे अनेके नालिकेल-वृक्षाः सन्ति।
(तट के पास अनेक नारियल के पेड़ हैं।) - अत्र सर्वे जनाः अतीव आनन्दं अनुभवन्ति।
(यहाँ सभी लोग बहुत आनंद का अनुभव कर रहे हैं।)
द्वितीयं चित्रम्: गणतन्त्रदिवसः (Republic Day Parade)Sanskrit Chitra Varnan

मञ्जूषा
(गणतन्त्रदिवसस्य, राष्ट्रभवनम्, सैनिकाः, टङ्कवाहनानि, पद-सञ्चालनम्, विमानद्वयम्, आकाशात्, राजमार्गे, पश्यन्ति, जनाः, गौरवास्पदम्, उत्सवावसरः।)
चित्र वर्णन के सरल वाक्य (हिन्दी अनुवाद सहित):
- एतत् चित्रम् गणतन्त्रदिवसस्य उत्सवस्य अस्ति।
(यह चित्र गणतंत्र दिवस के उत्सव का है।) - चित्रे विशालं राष्ट्रपतिभवनम् दृश्यते।
(चित्र में विशाल राष्ट्रपति भवन दिखाई दे रहा है।) - राजमार्गे सैनिकाः अनुशासनेन पद-सञ्चालनम् कुर्वन्ति।
(राजमार्ग पर सैनिक अनुशासन के साथ पद-सञ्चालन कर रहे हैं।) - त्रीणि प्रमुखाणि टङ्कवाहनानि गच्छन्ति।
(आगे तीन प्रमुख टैंक जा रहे हैं।) - आकाशे विमानद्वयम् उड्डीयते धूमं च मुञ्चति।
(आकाश में दो विमान उड़ रहे हैं और धुआं छोड़ रहे हैं।) - मार्गम् उभयतः अनेके जनाः उपविश्य एतद् दृश्यं पश्यन्ति।
(दोनों तरफ अनेक लोग बैठकर इस दृश्य को देख रहे हैं।) - एतत् चित्रम् अस्माकं देशस्य गौरवं शौर्यं च दर्शयति।
(यह चित्र हमारे देश के गौरव और शौर्य को दर्शाता है।)
तृतीयं चित्रम्: ताजमहल-भवनम् (Taj Mahal)Sanskrit Chitra Varnan

मञ्जूषा
(ताजमहल-भवनस्य, ऐतिहासिक-स्मारकम्, आगरा-नगरे, पर्यटकाः, दृश्यते, आकाशे, विमानानि, उद्यानम, जलकुण्डम्, सुन्दराणि, पश्यन्ति, छायाचित्रम्।)
चित्र वर्णन के सरल वाक्य (हिन्दी अनुवाद सहित):
- एतत् प्रसिद्धस्य ऐतिहासिक-स्मारकस्य ताजमहल-भवनस्य चित्रम् अस्ति।
(यह प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल भवन का चित्र है।) - एतत् विश्वप्रसिद्धं भवनम् उत्तरप्रदेशस्य आगरा-नगरे स्थितम् अस्ति।
(यह विश्व प्रसिद्ध भवन उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित है।) - भवनस्य पुरतः एकं सुन्दरं जलकुण्डम् अपि अस्ति।
(भवन के सामने एक सुंदर जलकुंड भी है।) - अत्र बहवः पर्यटकाः भ्रमणाय आगच्छन्ति।
(यहाँ बहुत से पर्यटक घूमने के लिए आते हैं।) - केचन जनाः ताजमहलस्य सम्मुखे स्थित्वा छायाचित्रं गृह्णन्ति।
(कुछ लोग ताजमहल के सामने खड़े होकर फोटो खींच रहे हैं।) - भवनस्य उभयतः सुन्दराणि उद्यानानि वृक्षाः च सन्ति।
(भवन के दोनों तरफ सुंदर बगीचे और पेड़ हैं।) - अस्मिन् चित्रे आकाशे विमानानि अपि उड्डीयन्ते।
(इस चित्र में आकाश में विमान भी उड़ रहे हैं।)
चतुर्थं चित्रम्: पुस्तकालयः (Library) Sanskrit Chitra Varnan

मञ्जूषा
(पुस्तकालयस्य, पुस्तकानि, उत्पीठिकायाम्, कपाटिकासु, बालकः, बालिका, पठतः, ध्यानपूर्वकम्, दीपः, आसन्दिकाद्वयम्, शान्तम्, वातावरणम्।)
चित्र वर्णन के सरल वाक्य (हिन्दी अनुवाद सहित):
- इदम् एकस्य पुस्तकालयस्य चित्रम् अस्ति।
(यह एक पुस्तकालय का चित्र है।) - अत्र कपाटिकासु बहूनि पुस्तकानि सन्ति।
(यहाँ अलमारियों में बहुत सी पुस्तकें हैं।) - चित्रे एकः बालकः एका बालिका च उत्पीठिकायाम् उपविश्य पठतः।
(चित्र में एक बालक और एक बालिका मेज पर बैठकर पढ़ रहे हैं।) - तौ ध्यानपूर्वकम् पुस्तकानि पठतः।
(वे दोनों ध्यानपूर्वक पुस्तकें पढ़ रहे हैं।) - उत्पीठिकायाम् एकः पठन–दीपः अपि प्रज्वलति।
(मेज पर एक स्टडी लैंप भी जल रहा है।) - उपवेशनाय अत्र आसन्दिकाद्वयम् वर्तते।
(बैठने के लिए यहाँ दो कुर्सियाँ हैं।) - पुस्तकालयस्य वातावरणम् अतीव शान्तम् सुखदं च अस्ति।
(पुस्तकालय का वातावरण बहुत शांत और सुखद है।)
छात्र उपर्युक्त चित्र-वर्णन के अभ्यासों को उत्तर सहित निम्नलिखित बटन पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं।
संस्कृत शब्दकोष के लिए यहाँ क्लिक करें
कक्षा 8 के संस्कृत चित्र वर्णन के लिए यहाँ क्लिक करें।