
संस्कृत अपठित गद्यांश कक्षा 9 के विद्यार्थियों की परीक्षा में पूछा जाने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है। चूँकि यह अनुच्छेद विद्यार्थियों के द्वारा पहले पढ़ा नहीं होता, इसलिए उन्हें थोड़ा कठिन लगता है। कक्षा 9 की परीक्षा में संस्कृत अपठित गद्यांश (अपठित-अवबोधनम्) को हल करते समय प्रश्नों के निर्देशों को ध्यान से समझना और व्याकरणिक नियमों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसा करके विद्यार्थी इस प्रश्न को सरलता से हल करके पूर्णांक प्राप्त कर सकते हैं। गद्यांश को सफलतापूर्वक हल करने के मुख्य नियम और सावधानियाँ नीचे दी गई हैं:
संस्कृत अपठित गद्यांश कक्षा 9 को हल करने के महत्वपूर्ण नियम (Rules to Follow)
- गद्यांश का पाठन: पूरे गद्यांश को कम से कम दो से तीन बार एकाग्रता से पढ़ें ताकि उसका मूल भाव समझ आ सके।
- एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर): यदि निर्देश में एक पद में उत्तर माँगा गया है, तो केवल एक ही मुख्य शब्द में उत्तर लिखें।
- पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूरे वाक्य में उत्तर): पूरे वाक्य में उत्तर देते समय गद्यांश की उस पंक्ति को खोजें और व्याकरण के अनुसार सही वाक्य संरचना में उत्तर दें।
- शीर्षक लेखन (Title): गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक (शीर्षकम्) लिखते समय ध्यान दें कि वह छोटा (1-3 शब्द) हो और पूरे पैराग्राफ के मुख्य विषय को दर्शाता हो।
- भाषिक कार्यम् (व्याकरण): इसमें गद्यांश पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं, जैसे:
कर्तृ-क्रिया पद : वाक्य में काम करने वाला (कर्ता) और क्रियापद पहचानना।
विशेषण-विशेष्य : जिसकी विशेषता बताई जाए (विशेष्य) और जो विशेषता हो (विशेषण)। जैसे – विशालाः वृक्षाः, मधुराणि फलानि। इन दोनों में विशालाः और मधुराणि विशेषण हैं और वृक्षाः और फलानि विशेष्य हैं।
पर्याय/विलोम पद : गद्यांश में से ही समानार्थक या विपरीतार्थक शब्द खोजना।
संस्कृत अपठित गद्यांश कक्षा 9 हल करते समय सावधानियाँ (Precautions)
अतिरिक्त जानकारी से बचें: अपनी तरफ़ से या गद्यांश से बाहर की कोई भी बात उत्तर में न जोड़ें; उत्तर पूरी तरह गद्यांश पर आधारित होना चाहिए। उत्तर देते समय शब्द भी गद्यांश से ही लिए जाने चाहिए।
हड़बड़ाहट न करें: प्रश्न को बिना समझे सीधे गद्यांश की लाइनें कॉपी न करें, इससे उत्तर गलत हो सकता है। प्रश्न को समझें और उसके अनुसार उत्तर छाँटें।
विभक्ति और वचन का ध्यान: प्रश्न जिस विभक्ति, लिंग और वचन (जैसे- कस्य, केन, कस्याः) में पूछा गया है, उत्तर भी उसी व्याकरणिक रूप में होना चाहिए। जैसे – सः केन सह आपणं गच्छति? का उत्तर होगा- सः जनकेन सह आपणं गच्छति।
समय प्रबंधन: गद्यांश को हल करने में बहुत अधिक समय न गँवाएँ, अभ्यास द्वारा गति को बेहतर रखें। इसके लिए परीक्षा के पहले पिछले सालों के प्रश्न ज्यादा से ज्यादा हल करें।
नीचे संस्कृत अपठित गद्यांश कक्षा 9 के कुछ उदाहरण दिए गए हैं। विद्यार्थी इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ें एवं अभ्यास करें। इससे उन्हें परीक्षा में अपठित गद्यांश हल करने में सहायता मिलेगी।
संस्कृत अपठित गद्यांश कक्षा 9 के लिए – विषय: परोपकारः
अनुच्छेदः
परोपकारः मानवजीवनस्य परमं लक्ष्यं अस्ति। परेषां उपकारः एव परोपकारः कथ्यते। प्रकृत्याः सर्वे अपि पदार्थाः परोपकाराय एव सन्ति। नद्यः स्वस्य जलं स्वयं न पिबन्ति, अपितु सर्वेभ्यः यच्छन्ति। वृक्षाः परोपकाराय एव फलानि यच्छन्ति। सूर्यः अपि परोपकाराय एव प्रकाशं करोति। परोपकारेण एव मनुष्यः संसारे शान्तिस्थापनां कर्तुं शक्नोति। यः मनुष्यः स्वार्थं त्यक्त्वा अन्येषां कल्याणं करोति, सः एव सत्यार्थे मानवः अस्ति। अतः अस्माभिः सदा परोपकारः करणीयः।
प्रश्नोत्तराणि (Questions & Answers):
I. एकपदेन उत्तरत (Answer in one word):
(क) कः मानवजीवनस्य परमं लक्ष्यं अस्ति?
उत्तरम्- परोपकारः
(ख) नद्यः स्वस्य किं स्वयं किं न पिबन्ति?
उत्तरम्- जलं
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत (Answer in full sentence):
(क) वृक्षाः किमर्थं फलानि यच्छन्ति?
उत्तरम्- वृक्षाः परोपकाराय एव फलानि यच्छन्ति।
(ख) सत्यार्थे कः मानवः अस्ति?
उत्तरम्- यः मनुष्यः स्वार्थं त्यक्त्वा अन्येषां कल्याणां करोति, सः एव सत्यार्थे मानवः अस्ति।
III. भाषिककार्यम् (Grammar/Language Work):
(क) ‘पिबन्ति’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदं (Subject) किम्?
उत्तरम् – नद्यः
(ख) ‘स्वार्थम्’ इति पदस्य विलोमपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत।
उत्तरम् – परोपकारः / परोपकाराय
IV. अस्य गद्यांशस्य उपर्युक्तं शीर्षकं लिखत (Suitable Title):
उत्तरम् – परोपकारस्य महत्त्वम् / परोपकारः
संस्कृत अपठित गद्यांश कक्षा 9 के लिए – विषय: अनुशासनम्
अनुच्छेदः
मानवजीवने अनुशासनस्य महती आवश्यकता अस्ति। नियमानां पालनम् एव अनुशासनम् कथ्यते। प्रकृतिः अपि सदा अनुशासनेन चलति। सूर्यः, चन्द्रः, ऋतवः च सर्वं समयेन एव भवन्ति। अनुशासनेन विना समाजस्य देशस्य च उन्नतिः असंभवा अस्ति। छात्रजीवने तु अनुशासनस्य सर्वाधिकं महत्त्वं वर्तते। अनुशासनेन विना छात्राः उद्दंडाः भवितुं शक्नुवन्ति। यः छात्रः गुरुणां आज्ञां पालयति समयेन च कार्याणि करोति सः एव जीवने सफलतां प्राप्नोति। । अतः अनुशासनं जीवनस्य सफलतायाः कुञ्जिका अस्ति।
प्रश्नोत्तराणि (Questions & Answers):
I. एकपदेन उत्तरत (Answer in one word):
(क)कस्य पालनम् अनुशासनम् कथ्यते?
उत्तरम्: नियमानां
(ख) कस्य जीवने अनुशासनस्य सर्वाधिकं महत्त्वं वर्तते?
उत्तरम्: छात्रजीवने
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत (Answer in full sentence):
(क)जीवने कः सफलतां प्राप्नोति?
उत्तरम्: यः छात्रः गुरुणां आज्ञां पालयति समयेन च कार्याणि करोति सः एव जीवने सफलतां प्राप्नोति।
(ख)अनुशासनेन विना कस्य उन्नतिः असंभवा अस्ति?
उत्तरम्: अनुशासनेन विना समाजस्य देशस्य च उन्नतिः असंभवा अस्ति।
III. भाषिककार्यम् (Grammar/Language Work):
(क)’महती’ इति विशेषणपदस्य विशेष्यपदं (Noun) किम्?
उत्तरम्: आवश्यकता
(ख)’असफलतायाः’ इति पदस्य विलोमपदं गद्यांशात् लिखत।
उत्तरम्: सफलतायाः
IV. अस्य गद्यांशस्य उपर्युक्तं शीर्षकं लिखत (Suitable Title):
उत्तरम्: अनुशासनस्य महत्त्वम् / छात्रजीवनं अनुशासनं च
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