Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 शेमुषी भाग 2 पाठ 1 शुचिपर्यावरणम्‌ अनुवाद, अन्वय, प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण MCQ Free Download

Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 की तैयारी कर रहे सभी CBSE छात्रों का इस विशेष गाइड में स्वागत है। कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में संस्कृत विषय में बेहतरीन अंक प्राप्त करने के लिए प्रथम अध्याय ‘शुचिपर्यावरणम्’ (Shuchi Paryavaranam) को अच्छी तरह समझना बेहद महत्वपूर्ण है। आधुनिक युग में बढ़ते प्रदूषण और प्रकृति के महत्व को दर्शाने वाला यह पाठ न केवल परीक्षा के दृष्टिकोण से, बल्कि हमारे जीवन के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है।

यदि आप इंटरनेट पर Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 के श्लोकों का सरल हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद, अन्वय, विस्तृत व्याकरण (संधि, समास, प्रकृति-प्रत्यय) और NCERT प्रश्न-उत्तर (Solutions) की तलाश कर रहे हैं, तो आपकी खोज यहाँ समाप्त होती है। इस व्यापक पोस्ट में हमने हर एक श्लोक को इतनी आसान भाषा में समझाया है कि आपको रटने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

Introduction Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 Shuchi Paryavaranam

Are you looking for a complete guide on Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1? You are in the right place. The first chapter, ‘Shuchi Paryavaranam’, is highly important for your board exams. This beautiful chapter talks about modern pollution and the value of nature.

Many students search online for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 solutions. In this post, we provide everything you need. You will get easy Hindi and English translations for all shlokas. We also include the proper Anwaya, detailed grammar (Sandhi and Samas), and NCERT question-answers. We explain every word simply so you do not have to memorize blindly.

This post is your ultimate study package. It will help you whether you want a quick exam revision or a deep understanding of the text. Let us start this scoring and beautiful Sanskrit journey together!

संस्कृत शेमुषी भाग 2 पाठ 1 श्लोक 1

दुर्वहमत्र जीवितं जातं प्रकृतिरेव शरणम्।
शुचि-पर्यावरणम्।।

महानगरमध्ये चलदनिशं कालायसचक्रम्।
मनः शोषयत् तनूः पेषयद् भ्रमति सदा वक्रम्।।
दुर्दान्तैर्दशनैरमुना स्यान्नैव जनग्रसनम्। शुचि… ।।1।।

अन्वय

अत्र जीवितं दुर्वहं जातं, (अतः) प्रकृतिः एव शरणम् (अस्ति)। शुचि पर्यावरणम् (स्यात्)। महानगरमध्ये चलदनिशं कालायसचक्रं मनः शोषयत् तनूः पेषयत् सदा वक्रं भ्रमति। अमुना दुर्दान्तैः दशनैः जनग्रसनं नैव स्यात्।

शब्दार्थ

संस्कृत हिन्दी अंग्रेजी
अत्र यहाँ Here
दुर्वहम् कठिन / दूभर Difficult / Burdensome
जीवितम् जीवन Life
जातम् हो गया है Has become
प्रकृतिरेव प्रकृति ही Nature alone
शरणम् आश्रय Refuge / Shelter
शुचि शुद्ध Pure / Clean
अनिशम् दिन-रातDay and night
कालायसचक्रम् लोहे का पहिया Iron wheel
शोषयत् सुखाते हुए Drying up
तनूः शरीर Body
पेषयत् पीसते हुए Crushing / Grinding
वक्रम् टेढ़ा Crookedly / Zigzag
भ्रमति घूमता है Moves / Rotates
अमुना इसके द्वारा By this
दुर्दान्तैः भयानक / क्रूर Fierce / Terrible
दशनैः दाँतों से With teeth
जनग्रसनम् मानव विनाश Destruction of mankind

हिंदी अनुवाद

यहाँ (महानगरों में) जीवन जीना कठिन हो गया है, अब प्रकृति की ही शरण है। शुद्ध पर्यावरण ही हमारा एकमात्र सहारा है। महानगरों के बीच रात-दिन लोहे का काल-रूपी पहिया चल रहा है। यह पहिया मन को सुखाते हुए और शरीर को पीसते हुए हमेशा टेढ़ा चलता रहता है। इस (लोहे के पहिये) के भयानक दाँतों से कहीं मानव जाति का विनाश न हो जाए। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।

English Translation

Life has become difficult here in the big cities, now nature is the only refuge. A pure environment is our only shelter. Day and night, the iron wheel (of machines/vehicles) keeps moving in the midst of the metropolis. It moves crookedly, constantly drying up the mind and crushing the body. May mankind not be destroyed by its fierce and terrible teeth. Therefore, a pure environment is our ultimate refuge.

श्लोक 2

कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति शतशकटीयानम्।
वाष्पयानमाला संधावति वितरन्ती ध्वानम्।।
यानानां पङ्क्तयो ह्यनन्ताः कठिनं संसरणम्। शुचि… ।।2।।

अन्वय

शतशकटीयानं कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति। ध्वानं वितरन्ती वाष्पयानमाला संधावति। यानानां ह्यनन्ताः पङ्क्तयः (सन्ति), (येन) संसरणं कठिनं (जातम्)।

शब्दार्थ

कज्जलमलिनम् काजल जैसा काला Black like soot
धूमम् धुआँ Smoke
मुञ्चति छोड़ता है Emits / Releases
शतशकटियानम् सैकड़ों मोटरगाड़ियाँ Hundreds of motor cars
वाष्पयानमाला रेलगाड़ियों की पंक्ति Row of trains
संधावति तेज़ी से दौड़ती है Rushes / Runs fast
वितरन्ती बिखेरती हुई Distributing / Spreading
ध्वानम् कोलाहल / शोर Noise / Sound
यानानाम् वाहनों की Of vehicles
पङ्क्तयः कतारें / पंक्तियाँ Rows / Lines
अनन्ताः असंख्य / अनगिनत Endless / Infinite
संसरणम् चलना / सरकना Moving / Walking

हिंदी अनुवाद

यहाँ (महानगरों में) जीवन जीना कठिन हो गया है, अब प्रकृति की ही शरण है। शुद्ध पर्यावरण ही हमारा एकमात्र सहारा है। महानगरों के बीच रात-दिन लोहे का काल-रूपी पहिया चल रहा है। यह पहिया मन को सुखाते हुए और शरीर को पीसते हुए हमेशा टेढ़ा चलता रहता है। इस (लोहे के पहिये) के भयानक दाँतों से कहीं मानव जाति का विनाश न हो जाए। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।

English Translation

Life has become difficult here in the big cities, now nature is the only refuge. A pure environment is our only shelter. Day and night, the iron wheel (of machines/vehicles) keeps moving in the midst of the metropolis. It moves crookedly, constantly drying up the mind and crushing the body. May mankind not be destroyed by its fierce and terrible teeth. Therefore, a pure environment is our ultimate refuge.

श्लोक 3

वायुमण्डलं भृशं दूषितं न हि निर्मलं जलम्।
कुत्सितवस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं धरातलम्।।
करणीयं बहिरन्तर्जगति तु बहु शुद्धीकरणम्। शुचि… ।।3।।

अन्वय

वायुमण्डलं भृशं दूषितं (अस्ति), जलं हि निर्मलं न (अस्ति)। भक्ष्यं कुत्सितवस्तुमिश्रितं (जातं), धरातलं समलं (अस्ति)। जगति बहिः अन्तः च तु बहु शुद्धीकरणं करणीयम्।

शब्दार्थ

संस्कृत हिन्दी अंग्रेजी
भृशम् अत्यधिक / बहुत ज़्यादा Excessive / Very much
दूषितम् गंदा / प्रदूषित Polluted
निर्मलम् स्वच्छ / साफ़ Pure / Clean
भक्ष्यम् भोज्य पदार्थ Edible items / Food
कुत्सितवस्तुमिश्रितम् मिलावटी वस्तुओं से युक्त Adulterated with bad substances
समलम् गंदगी से युक्त / मैला Filthy / Dirty
धरातलम् पृथ्वी का तल Earth’s surface
करणीयम् करना चाहिए Should be done
बहिः बाहर Outside
अन्तः अंदर Inside
जगति संसार में In the world
शुद्धीकरणम् साफ़-सफ़ाई / पावन करना Purification

हिंदी अनुवाद

आज संपूर्ण वायुमंडल बहुत अधिक दूषित हो गया है और जल (पानी) भी शुद्ध नहीं रह गया है। खाने योग्य सारी वस्तुएँ (खाद्य पदार्थ) आज अशुद्ध (विषैली) वस्तुओं से मिलावटी हो गई हैं तथा सारी धरती मैली (कूड़े-कचरे से युक्त) हो चुकी है। इन सभी अशुद्धियों को दूर करके बाहरी संसार और अंतर्जगत अर्थात मन व बुद्धि आदि को बहुत अधिक शुद्ध करना चाहिए। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।

English Translation

Today, the entire atmosphere has become heavily polluted, and even the water is no longer pure. All edible items are adulterated with harmful/toxic substances, and the whole earth has become filthy. There is a great need to purify the external world as well as the internal mind and intellect. Therefore, a pure environment is our only refuge.

श्लोक 4

कञ्चित् कालं नय मामस्मान्नगराद् बहुदूरम्।
प्रपश्यामि ग्रामान्ते निर्झर-नदी-पयःपूरम्।।
एकान्ते कान्तारे क्षणमपि मे स्यात् सञ्चरणम्। शुचि… ।।4।।

अन्वय

कञ्चित् कालं माम् अस्मात् नगरात् बहुदूरं नय। (अहं) ग्रामान्ते निर्झर-नदी-पयःपूरं प्रपश्यामि। एकान्ते कान्तारे मे क्षणम् अपि सञ्चरणं स्यात्।

शब्दार्थ

संस्कृत हिन्दी अंग्रेजी
कञ्चित् कुछ Some
कालम् समय को Time
नय ले जाओ Take
अस्मात् इस From this
नगरात् शहर से From the city
बहुदूरम् बहुत दूर Very far
प्रपश्यामि अच्छी तरह देखता हूँ Look at / See clearly
ग्रामान्ते गाँव की सीमा पर At the village border
निर्झर झरना Waterfall
पयःपूरम् पानी से भरा तालाब Water reservoir / Pond
एकान्ते एकांत / सुनसान Lonely / Solitary
कांतारे जंगल में In the forest
क्षणमपि पल भर भी Even for a moment
सञ्चरणम् घूमना / टहलना Wandering / Strolling

हिंदी अनुवाद

मुझे कुछ समय के लिए इस (प्रदूषित) नगर से बहुत दूर ले चलिए। मैं गाँव की सीमा पर जल से भरी हुई नदी, तालाब और झरनों को देखना चाहता हूँ। सुनसान (शांत) जंगल में मेरा क्षण भर के लिए भी भ्रमण (विहार) हो सके। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।

English Translation

Take me far away from this polluted city for a while. I wish to see the waterfalls, rivers, and water-filled ponds at the village boundary. May I spend even a brief moment wandering in a lonely and peaceful forest. Therefore, a pure environment is our only refuge.

श्लोक 5

हरिततरूणां ललितलतानां माला रमणीया।
कुसुमावलिः समीरचालिता स्यान्मे वरणीया।।
नवमालिका रसालं मिलिता रुचिरं सङ्गमनम्। शुचि… ।।5।।

अन्वय

(अत्र) हरिततरूणां ललितलतानां रमणीया माला (अस्ति)। समीरचालिता कुसुमावलिः मे वरणीया स्यात्। रसालं मिलिता नवमालिका (तयोः) रुचिरं सङ्गमनं (अस्ति)।

शब्दार्थ

संस्कृत हिन्दी अंग्रेजी
हरिततरूणाम् हरे वृक्षों की Of green trees
ललितलतानाम् सुंदर बेलों की Of beautiful creepers
रमणीया मनमोहक / सुंदर Delightful / Beautiful
माला कतार / पंक्ति Row / Garland
समीरचालिता हवा द्वारा हिलाई गई Swayed by wind
कुसुमावलिः फूलों की पंक्ति Clusters of flowers
वरणीया चुनने योग्य Worth choosing
रसालम् आम का पेड़ Mango tree
मिलिता मिली हुई Met / United
नवमालिका चमेली Jasmine/
रुचिरम् सुंदर / आकर्षक Beautiful / Attractive
सङ्गमनम् मिलन Union / Meeting

हिंदी अनुवाद

हरे-भरे वृक्षों की और सुंदर लताओं की मनमोहक पंक्तियाँ (माला) सुशोभित हो रही हैं। हवा से हिलाई गई फूलों की पंक्तियाँ मेरे लिए चुनने योग्य (ग्रहण करने योग्य) हों। आम के पेड़ से चमेली की लता का सुंदर मिलन (संगम) बहुत ही आकर्षक लग रहा है। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।

English Translation

The beautiful rows of green trees and lovely creepers are delightful to watch. The rows of flowers swayed by the gentle breeze should welcome me. The beautiful union of the fresh jasmine vine with the mango tree looks highly attractive. Therefore, a pure environment is our only refuge.

श्लोक 6

अयि चल बन्धो! खगकुलकलरवगुञ्जितवनदेशम्।
पुर-कलरवसंभ्रमितजनेभ्यो धृतसुखसन्देशम्।।
चाकचिक्यजालं नो कुर्याज्जीवितसहरणम्। शुचि… ।।6।।

अन्वय

अयि बन्धो! खगकुलकलरवगुञ्जितवनदेशं चल। पुर-कलरवसंभ्रमितजनेभ्यो धृतसुखसन्देशम् (धारय)। चाकचिक्यजालं जीवितसहरणं नो कुर्यात्।

शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दीअंग्रेजी
अयि अरे / हे O! / Hey
बन्धो भाई / मित्र Brother / Friend
खगकुल पक्षियों का समूह Flock of birds
कलरव पक्षियों की चहचहाहट Chirping of birds
गुञ्जित गुंजायमान Resonating / Echoing
वनदेशम् जंगल के प्रदेश को Forest region
पुर नगर / शहर Town / City
संभ्रमित परेशान / भ्रमित Confused / Distressed
जनेभ्यः लोगों के लिए For the people
धृत धारण किया हुआ Held / Possessed
सुखसन्देशम् आनंद का संदेश Message of happiness
चाकचिक्यजालम् चकाचौंध भरी दुनिया Glamorous/Artificial world
जीवितसहरणम् जीवन के रस का हरण Destruction of life’s joy

हिंदी अनुवाद

हे मित्र (भाई)! पक्षियों के समूह की मधुर आवाज़ (चहचहाहट) से गूंजते हुए वन प्रदेश की ओर चलो। नगर के शोर-शराबे से परेशान (भ्रमित) लोगों के लिए धैर्य और सुख का संदेश धारण करो। नगरों की यह चकाचौंध भरी कृत्रिम दुनिया कहीं हमारे जीवन के आनंद (रस) का हरण न कर ले। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।

English Translation

O friend! Let us go to the forest region that resonates with the sweet chirping of flocks of birds. Hold a message of peace and happiness for the people who are distressed by the hustle and bustle of the city. Let not the artificial glamour of the city steal the joy and essence of our lives. Therefore, a pure environment is our only refuge.

श्लोक 7

प्रस्तरतले लतातरुगुल्मा नो भवन्तु पिष्टाः।
पाषाणी सभ्यता निसर्गे स्यान्न समाविष्टा।।
मानवाय जीवनं कामये नो जीवन्मरणम्। शुचि… ।।7।।

अन्वय

प्रस्तरतले लतातरुगुल्माः पिष्टाः नो भवन्तु। निसर्गे पाषाणी सभ्यता समाविष्टा न स्यात्। (अहं) मानवाय जीवनं कामये, जीवन्मरणं नो (कामये)।

शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दीअंग्रेजी
प्रस्तरतले पत्थरों के नीचे Under the stones
लतातरुगुल्माः बेल, पेड़ और झाड़ी Creepers, trees, and bushes
पिष्टाः पिसे हुए Crushed
नो नहीं Not
भवन्तु होवें Should be
निसर्गे प्रकृति में In nature
पाषाणी पथरीली Stony
सभ्यता संस्कृति / सभ्यता Civilization
समाविष्टा समाई हुई Engulfed / Included
मानवाय मनुष्य के लिए For human beings
कामये कामना करता हूँ Wish / Desire
जीवन्मरणम् जीते जी मरना Living death

हिंदी अनुवाद

पत्थरों के नीचे (तल पर) लताएँ, पेड़ और झाड़ियाँ पिस न जाएँ। प्रकृति में पथरीली सभ्यता (शहरीकरण/कंक्रीट का साम्राज्य) समाविष्ट (शामिल) न हो। मैं मनुष्यों के लिए सच्चे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूँ, जीते जी मरने (घुट-घुट कर जीने) की नहीं। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।

English Translation

May the creepers, trees, and bushes not get crushed beneath the heavy stones (of urbanization). May the stony civilization (concrete world) not engulf mother nature. I desire a healthy life for human beings, not a living death. Therefore, a pure environment is our only refuge.

Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 Question Answers (NCERT Solutions)

एकपदेन उत्तरत (One Word Answers)

एकपदेन उत्तरं लिखत―
(उत्तर एक वाक्य में लिखिए)

(क) अत्र जीवितं कीदृशं जातम्?
(यहाँ जीवन कैसा हो गया है?)
उत्तरम् – दुर्वहम्।

(ख) अनिशं महानगरमध्ये किं प्रचलति?
(शहर में हर समय क्या चल रहा है?)
उत्तरम् – कालायसचक्रम्।

(ग) कुत्सितवस्तुमिश्रितं किमस्ति?
(इस कुत्सित चीज़ों से मिश्रित क्या है?)
उत्तरम् – भक्ष्यम्।

(घ) अहं कस्मै जीवनं कामये?
(मैं किसके लिए जीवन की कामना करूँ?)
उत्तरम् – मानवाय।

(ङ) केषां माला रमणीया?
(किसका हार सुन्दर है?)
उत्तरम् – हरिततरूणां ललितलतानाम्।

पूर्णवाक्येन उत्तरत (Full Sentence Answers)

अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत―
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए।)

(क) कविः किमर्थं प्रकृतेः शरणम् इच्छति?
(कवि प्रकृति का आश्रय क्यों चाहता है?)
उत्तरम् – कवि महानगरस्य दुर्वहं जीवनं दृष्ट्वा तस्मात् भीतः शुद्धपर्यावरणाय प्रकृतेः शरणम् इच्छति।
(कवि महानगरों के कठिन जीवन को देखकर उससे भयभीत होता है और शुद्ध वातावरण के लिए प्रकृति की शरण में जाता है।)

(ख) कस्मात् कारणात् महानगरेषु संसरणं कठिनं वर्तते?
(महानगरीय क्षेत्रों में संचरण कठिन क्यों है?)
उत्तरम् – अहर्निशं लौहचक्रस्य सञ्चरणात् यानानां बाहुल्यात् च महानगरेषु संसरणं कठिनं वर्तते।
(लोहे के पहिये की दैनिक आवाजाही और वाहनों की बहुतायत के कारण शहरों में परिवहन कठिन है।)

(ग) अस्माकं पर्यावरणे किं किं दूषितम् अस्ति?
(हमारे पर्यावरण में क्या-क्या प्रदूषित है?)
उत्तरम् – अस्माकं पर्यावरणे वायुमण्डलं, जलं, भक्ष्यं, धरातलं च दूषितम् अस्ति।
(हमारा पर्यावरण में हवा, पानी, भोजन और मिट्टी से प्रदूषित है।)

(घ) कविः कुत्र संचरणं कर्तुम् इच्छति?
(कवि कहाँ घूमना चाहता है?)
उत्तरम् – कविः ग्रामान्ते एकान्ते कान्तारे सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति। 
(कवि गाँव के अंत में एक सुनसान जंगल में घूमना चाहता है।)

(ङ) स्वस्थजीवनाय कीदृशे वातावरणे भ्रमणीयम्?
(स्वस्थ जीवन के लिए मुझे किस प्रकार के वातावरण में भ्रमण करना चाहिए?)
उत्तरम् – स्वस्थजीवनाय शुचि – वातावरणे (पर्यावरणे) भ्रमणीयम्।
(स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ वातावरण में भ्रमण करना चाहिए।)

(च) अन्तिमे पद्यांशे कवेः का कामना अस्ति?
(अंतिम कविता में कवि की इच्छा क्या है?)
उत्तरम् – अन्तिमे पद्यांशे कवेः कामना अस्ति यत् निसर्गे पाषाणी सभ्यता समाविष्टा न स्यात्।
(अंतिम छंद में कवि की इच्छा है कि प्रकृति में पाषाण सभ्यता का समावेश न हो।)

रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (Question Formation)

रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत―
(रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्नों का निर्माण करें।)

(क) शकटीयानम् कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति ।
प्रश्नम् ― शकटीयानं कीदृशं धूमं मुञ्चति?

(ख) उद्याने पक्षिणां कलरवं चेतः प्रसादयति । 
प्रश्नम् ― उद्याने केषां कलरवं चेतः प्रसादयति?

(ग) पाषाणीसभ्यतायां लतातरुगुल्माः प्रस्तरतले पिष्टाः सन्ति ।
प्रश्नम् ― पाषाणीसभ्यतायां के प्रस्तरतले पिष्टाः सन्ति?

(घ) महानगरेषु वाहनानाम् अनन्ताः पङ्क्तयः धावन्ति ।
प्रश्नम् ― कुत्र वाहनानाम् अनन्ताः पङ्क्तयः धावन्ति? 

(ङ) प्रकृत्याः सन्निधौ वास्तविकं सुखं विद्यते ।
प्रश्नम् ― कस्याः सन्निधौ वास्तविकं सुखं विद्यते?

Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 Grammar (व्याकरणम्)

1. Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 संधि-विच्छेद (Sandhi-Vicched)

पद संधिविच्छेद संधि का नाम
प्रकृतिरेव प्रकृतिः + एव विसर्ग संधि
चलदग्निशम् चलत् + अनिशम् व्यंजन संधि
स्यान्नैव स्यात् + न + एव व्यंजन और वृद्धि (स्वर) संधि
पुनरेव पुनः + एव विसर्ग संधि
कज्जलमलिनम् कज्जल + मलिनम् संयोग (वर्ण मेल)
वाष्पयानमाला वाष्पयान + माला संयोग (वर्ण मेल)
ह्यनन्ताः हि + अनन्ताः यण स्वर संधि
बहिरन्तर्जगति बहिः + अन्तः + जगति विसर्ग संधि
मामास्मान्नगरात् माम् + अस्मात् + नगरात् व्यंजन संधि
ग्रामान्ते ग्राम + अन्ते दीर्घ स्वर संधि
क्षणमपि क्षणम् + अपि संयोग (वर्ण मेल)
स्यान्मे स्यात् + मे व्यंजन संधि
कुसुमावलिः कुसुम + आवलिः दीर्घ स्वर संधि
तयोरपि तयोः + अपि विसर्ग संधि
सङ्गमनम् सम् + गमनम् व्यंजन संधि
कुर्याज्जीवितसहरणम् कुर्यात् + जीवितसहरणम् व्यंजन संधि
लतातरुगुल्माः लता + तरु + गुल्माः संयोग (वर्ण मेल)
स्यान्न स्यात् + न व्यंजन संधि

2. Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 – समास-विग्रह (Samas)

समस्त पद समासविग्रह समास का नाम
महानगरम् महत् च तत् नगरम् कर्मधारय समास
कालायसचक्रम् कालायसस्य चक्रम् षष्ठी तत्पुरुष समास
कज्जलमलिनम् कज्जलमिव मलिनम् कर्मधारय समास
वाष्पयानमाला वाष्पयानानां माला षष्ठी तत्पुरुष समास
वायुमण्डलम वायोः मण्डलम् षष्ठी तत्पुरुष समास
कुत्सितवस्तुमिश्रितम् कुत्सितैः वस्तुभिः मिश्रितम् तृतीया तत्पुरुष समास
धरातलम् धरायाः तलम् षष्ठी तत्पुरुष समास
समलम् मलेन सहितम् अव्ययीभाव समास
ग्रामान्ते ग्रामस्य अन्ते षष्ठी तत्पुरुष समास
पयःपूरम् पयसाम् पूरम् षष्ठी तत्पुरुष समास
एकान्ते एकः च असौ अन्तः कर्मधारय समास
हरिततरूणाम् हरिताः च ते तरवः कर्मधारय समास
ललितलतानाम् ललिताः च याः लताः कर्मधारय समास
कुसुमावलिः कुसुमानाम् आवलिः षष्ठी तत्पुरुष समास
समीरचालिता समीरेण चालिता तृतीया तत्पुरुष समास
नवमालिका नवा मालिका कर्मधारय समास
खगकुलम् खगानां कुलम् षष्ठी तत्पुरुष समास
वनदेशम् वनस्य देशम् षष्ठी तत्पुरुष समास
सुखसन्देशम् सुखस्य सन्देशम् षष्ठी तत्पुरुष समास
लतातरुगुल्माः लता च तरुः च गुल्मः च द्वंद्व समास
पाषाणी सभ्यता पाषाणमयी सभ्यता कर्मधारय समास
जीवन्मरणम् जीवितं च मरणं च द्वंद्व समास

3. प्रकृति-प्रत्यय विभाग (Prakriti-Pratyaya)

पद प्रकृति-प्रत्यय विच्छेद प्रत्यय का नाम
जातम् जन् + क्त क्त प्रत्यय
जीवितम् जीव् + क्त क्त प्रत्यय
चलत् चल् + शतृ शतृ प्रत्यय
शोषयत् शुष् + णिच् + शतृ शतृ प्रत्यय
पेषयत् पिष् + णिच् + शतृ शतृ प्रत्यय
दूषितम् दुष् + णिच्छ + क्त क्त प्रत्यय
निर्मलम् निर् + मल् + अच् अच् प्रत्यय
मिश्रितम् मिश्र् + क्त क्त प्रत्यय
करणीयम् कृ + अनीयर अनीयर प्रत्यय
शुद्धीकरणम् शुद्ध + च्वि + कृ + ल्युट् ल्युट् प्रत्यय
सञ्चरणम् सम् + चर् + ल्युट् ल्युट् प्रत्यय
रमणीया रम् + अनीयर + टाप् अनीयर और टाप् प्रत्यय
वरणीया वृ + अनीयर + टाप् अनीयर और टाप् प्रत्यय
चालिता चल् + णिच् + क्त + टाप् क्त और टाप् प्रत्यय
मिलिता मिल् + क्त + टाप् क्त और टाप् प्रत्यय
गुञ्जितम् गुञ्ज् + क्त क्त प्रत्यय
संभ्रमित सम् + भ्रम् + क्त क्त प्रत्यय
धृत धृ + क्त क्त प्रत्यय
सहरणम् सम् + हृ + ल्युट् ल्युट् प्रत्यय
पिष्टाः पिष् + क्त क्त प्रत्यय
समाविष्टा सम् + आ + विश् + क्त + टाप् क्त और टाप् प्रत्यय

4. पर्यायवाची शब्द (Synonyms

पद पर्यायवाची शब्द
सलिलम् जलम् / नीरम्
प्रकृतिः निसर्गः / सृष्टिः
आम्रम् रसालम् / सहकारः
वनम् कान्तारम् / विपिनम् / अरण्यम्
शरीरम् तनूः / कायः
कुसुमम् पुष्पम् / प्रसूनम्
बुद्धिः मतिः / मेधा
राक्षसः दानवः / असुरः
नेत्रम् नयनम् / लोचनम्
शीघ्रम् सत्वरम् / द्रुतम्
सुन्दरम् रुचिरम् / ललितम् / रमणीयम्
पक्षः खगः / विहगः
नगरम् पुरम् / पत्तनम्
वायुः समीरः / पवनः
पृथ्वी धरातलम् / धरा / भूः

5. विलोम शब्द (Antonyms)

पद विलोम शब्द
सुकृतम् दुष्कृतम्
दूषितम् निर्मलम् / शुद्धम्
दानवाय मानवाय
शान्तम् ध्वानयुक्तम् / कोलाहलपूर्णम्
जीवितम् मरणम्
वक्रम् ऋजु (सीधा)
गच्छति आगच्छति
बहिरन्तः केवलं बहिः (अन्तः का विलोम बहिः)
अशुद्धम् शुद्धम्
दुर्वहम् सुवहम् (सरलम्)
सुखम् दुःखम्
रमणीयम् अरमणीयम्
अनन्ताः सान्ताः (सीमित)
निर्मलम् समलम् (मलिनम्)

निष्कर्ष (Conclusion): बोर्ड परीक्षा में सफलता की राह

Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 का यह पाठ ‘शुचिपर्यावरणम्’ हमें न केवल परीक्षा के लिए तैयार करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश भी देता है। यदि आप इस पोस्ट में दिए गए श्लोकों के अर्थ, अन्वय और व्याकरण का नियमित अभ्यास करते हैं, तो बोर्ड परीक्षा में इस चैप्टर से आपका एक भी अंक नहीं कटेगा।

संस्कृत एक बेहद स्कोरिंग विषय है। इसे रटने के बजाय समझकर पढ़ना ही पूरे अंक (100/100) पाने का एकमात्र मंत्र है। इस गाइड को अपने पास सेव कर लें ताकि परीक्षा के दिनों में आप तुरंत क्विक रिवीजन कर सकें।

Conclusion: Your Path to Board Exam Success

Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 teaches us a vital lesson about nature. ‘Shuchi Paryavaranah’ is not just important for marks. It also inspires us to protect our environment.

Practice the shlokas, Anwaya, and grammar daily using this guide. If you do this, you will easily score full marks in this chapter. Sanskrit is a highly scoring subject. Do not memorize it blindly. Understand the roots, and you will succeed. Bookmark this complete guide today for quick revision before your CBSE board exams!

Downloads

कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक में आये हुए व्याकरण से सम्बन्धित प्रश्नों को यहाँ अलग-अलग बहुविकल्पीय अभ्यासों के रूप में दिया गया है। आप नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके MCQ Practice Worksheet डाउनलोड करके उसका अभ्यास कर सकते हैं। इन अभ्यास पत्रों से आपको अंदाज़ा लग जाएगा कि परीक्षा में व्याकरण के प्रश्न कैसे पूछे जाते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top