प्रस्तुत लेख में हम सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की नई संस्कृत पाठ्यपुस्तक के Deepakam class 8 chapter 7 “मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा“ का अध्ययन करेंगे। इस पाठ में कुल चार सुंदर कविताएँ (श्लोक) दी गई हैं। यहाँ उन श्लोकों का हिंदी अनुवाद दिया गया है।
आपकी पाठ्यपुस्तक दीपकम् के इस पाठ में श्लोक के अन्वय और संस्कृत भावार्थ पहले से ही दिए गए हैं। लेख में हमने श्लोकों का हिंदी अनुवाद Hindi Translation ) और उसके भावार्थ का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया है। यहाँ अभ्यास कार्य से—‘एकपदेन उत्तरत’ और ‘पूर्णवाक्येन उत्तरत’ को शामिल किया है। इससे आप बिना किसी अतिरिक्त उलझन के सीधे महत्वपूर्ण अभ्यास कार्य पढ़ सकें।
Sanskrit Deepakam class 8 chapter 7 मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा: पाठ का सार
संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। भारत में इसे सभी भाषाओँ की जननी माना जाता है। इसे गीर्वाणभारती, सुरभारती, सुरवाणी, सुरभाषा आदि नामों से भी जाना जाता है। प्रस्तुत पाठ में इस भाषा के विकास और महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। ऋषियों एवं मुनियों ने देववाणी संस्कृत भाषा का विकास ततः विस्तार किया है। कवियों और लेखकों ने अपनी रचनाओं के द्वारा संस्कृत भाषा का गौरव बढ़ाया है।
भारत के प्राचीन ग्रन्थ वेद-पुराण-उपनिषद-रामायण आदि इसी भाषा में रचे गए हैं। अपनी प्राचीन गौरवपूर्ण संस्कृति एवं इतिहास के विषय में जानने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है। संस्कृत भाषा तथा उसके अध्ययन का महत्त्व प्रतिपादित करना ही यही इस पाठ का लक्ष्य है। इस पाठ में कवि ने कुछ स्थानों को संस्कृत के सीधे माँ कहकर भी संबोधित किया है। कहीं-कहीं सामान्य वर्णन है।
About the Sanskrit Language
Sanskrit is one of the oldest languages in the world. In India, it is revered as the mother of all languages. It is also popularly known by divine names such as Girvanabharati, Surabharati, Suravani, and Surabhasha.
This lesson highlights the evolution, historical development, and rich significance of this sacred language. Ancient sages and seers (Rishis and Munis) developed and expanded the reach of this Devavani (the language of the gods), while eminent poets and scholars enhanced its glory through their literary works.
India’s most ancient texts—including the Vedas, Puranas, Upanishads, and the epic Ramayana—were originally composed in this language. The core objective of this chapter is to establish the profound importance of Sanskrit and its study. Throughout the verses, the poet beautifully addresses the language directly as ‘Mother’.
Sanskrit Deepakam class 8 chapter 7 मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा: भूमिका (मूलपाठ, शब्दार्थ एवं हिंदी अनुवाद)
CBSE की नई पुस्तकों में पाठ आरंभ के पूर्व संवाद के माध्यम से भूमिका प्रस्तुत की जाती है। इस पाठ में ओमिता नाम की एक लड़की और उसकी भगिनी का संवाद है। हम यहाँ उसका संस्कृत मूलपाठ, शब्दार्थ तथा हिन्दी अनुवाद दे रहे हैं।
प्रथम संवाद:
ओमिता – भगिनि ! अद्य श्रावणी पूर्णिमा अस्ति । वदतु एतस्याः किं वैशिष्ट्यम् ?
भगिनी – अहं जानामि अद्य संस्कृतदिवसः अस्ति। वयम् एतम्
आसप्ताहम् आचरामः।
ओमिता– सत्यम्। किं भवत्याः विद्यालये संस्कृतदिवसम् अधिकृत्य केषाञ्चन विशिष्टकार्यक्रमाणां योजना कृता?
भगिनी– आम् ओमिते! मम विद्यालये अनेकेषां कार्यक्रमाणां योजना रचिता ।
शब्दार्थाः
| Sanskrit (संस्कृत) | Hindi (हिंदी) | English |
|---|---|---|
| भगिनी (Bhagini) | बहन | Sister |
| श्रावणी (Shravani) | सावन | Shravan month |
| वदतु (Vadatu) | बोलो / बताओ | Speak / Tell |
| एतस्याः (Etasyah) | इसकी | Of this / Her |
| वैशिष्ट्यम् (Vaishishtyam) | विशेषता | Specialty |
| आसप्ताहम् (Aasaptaham) | पूरे सप्ताह | All week long |
| आचरामः (Aacharamah) | हम सब मनाते हैं | We celebrate |
| भवत्याः (Bhavatyah) | आपके / आपकी | Your / Yours |
| अधिकृत्य (Adhikritya) | आधार बनाकर | Based on |
| केषाञ्चन (Keshanchana) | किन्हीं के / कुछ के | Of some |
| विशिष्टकार्यक्रमाणां | विशेष कार्यक्रमों की | Of special programs |
| कृता (Krita) | की है / की गई | Done / Performed |
| आम् (Aam) | हाँ | Yes |
| रचिता (Rachita) | बनाई है / रची गई | Created / Composed |
हिन्दी अनुवादः
ओमिता– बहन! आज सावन (मास की) पूर्णिमा है। इसकी विशेषता बताओ।
बहन– मैं जानती हूँ आज संस्कृत दिवस है। हम इसका पूरे सप्ताह आचरण करते हैं। (मनाते हैं)
ओमिता– सत्य। क्या आपके विद्यालय में संस्कृत दिवस को आधार बनाकर (के उपलक्ष्य में) किसी विशेष कार्यक्रम की योजना की।
बहन– हाँ ओमिता! मेरे विद्यालय में अनेक कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
द्वितीयः संवादः
ओमिता-अहो एवम्! किं तत्र भवती भागं ग्रहीष्यति ?
बहन-आम् ओमिते! अहं तु गीतगायनप्रतियोगितायां भागं ग्रहीष्यामि ।
ओमिता– भगिनि ! अहमपि आगन्तुम् इच्छामि।
बहन– अवश्यम्। अहं भवत्याः कृते अधुना एव निमन्त्रणपत्रं यच्छामि।
ओमिता– भगिनि ! तत्र भवती किं गीतं गास्यति ? कृपया मामपि श्रावयतु ।
भगिनी-अस्तु अहं गायामि, भवति अनुगायतु।
शब्दार्थाः
| Sanskrit (संस्कृत) | Hindi (हिंदी) | English |
|---|---|---|
| एवम् (Evam) | ऐसा है / इस प्रकार | Like this / So it is |
| भवती (Bhavati) | आप (स्त्रीलिङ्ग) | You (Feminine) |
| ग्रहीष्यति (Grahishyati) | ग्रहण करेंगी / लेंगी | Will accept / take |
| आगन्तुम् (Aagantum) | आने के लिए | To come |
| इच्छामि (Ichhami) | चाहती हूँ / चाहता हूँ | I wish / want |
| भवत्याः कृते | आपके लिए (स्त्रीलिङ्ग) | For you (Fem.) |
| यच्छामि (Yachhami) | देती हूँ / देता हूँ | I give / offer |
| गास्यति (Gasyati) | गाओगी / गाएगी | Will sing |
| मामपि (Maamapi) | मुझे भी (माम् + अपि) | Me too / To me also |
| श्रावयतु (Shravayatu) | सुनाओ | Please recite / play |
| अनुगायतु (Anugayatu) | पीछे गाओ / दोहराओ | Sing along / repeat |
हिंदी अनुवादः
ओमिता– अहो, ऐसा है ! क्या वहाँ आप भाग लेंगी?
बहन– हाँ ओमिता! मैं तो गीतगायन प्रतियोगिता में भाग लूँगी।
ओमिता– बहन! मैं भी आना चाहती हूँ।
बहन– अवश्य! मैं आपके लिए अब ही निमंत्रणपत्र देती हूँ।
ओमिता– बहन! वहाँ आप क्या गीत गाओगी? कृपया मुझे भी सुनाओ।
बहन– हाँ, मैं गाती हूँ, आप पीछे गाओ।
Sanskrit Deepakam class 8 chapter 7 मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा: श्लोक, पदच्छेद, हिन्दी एवं अंग्रेजी अनुवाद
प्रथमः श्लोकः
मुनिवरविकसितकविवरविलसित-
मञ्जुलमञ्जूषा, सुन्दरसुरभाषा ।
अयि मातस्तव पोषणक्षमता
मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा ॥१॥
पदच्छेदः
मुनिवर – विकसित – कविवर – विलसित-मञ्जुल -मञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा । अयि मातः ! तव पोषणक्षमता मम वचनातीता सुन्दरसुरभाषा ।
शब्दार्थाः
| Sanskrit (संस्कृत) | Hindi (हिंदी) | English |
|---|---|---|
| विलसित (Vilasita) | आनन्ददायक / मनोहर | Delightful / Playful |
| मञ्जुला (Manjula) | मनोहरा / सुन्दर | Beautiful / Lovely |
| मञ्जूषा (Manjusha) | पेटिका / संदूक | Box / Chest |
| मातस्तव (Maatastava) | माता तुम्हारी (मातः + तव) | Your mother |
| पोषणक्षमता | पालनशक्ति | Nurturing capacity |
| वचनातीता | वचन से परे / अकथनीय | Beyond words |
अन्वयः
(त्वं) मुनिवरविकसितकविवरविलसितमञ्जुलंमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा (असि) । अयि मातः ! तव पोषणक्षमता मम वचनातीता अस्ति ।
हिन्दी अनुवादः
(तुम) मुनियों के द्वारा विकसित, श्रेष्ठ कवियों के द्वारा विलास को प्राप्त होने वाली हो। तुम्हारी कोमल पदावली से युक्त ज्ञान की पेटिका है। तुम देवताओं की सुन्दर भाषा हो। हे माता! तुम्हारी पालनशक्ति वचनों से परे है। यहाँ पालनशक्ति का अर्थ वस्तुतः अन्य भाषाओं के पोषण या विकास से है। कवि के अनुसार वह संस्कृत भाषा की इस क्षमता का वर्णन करने में असमर्थ है।
English meaning
You are developed by the sages and brought to aesthetic brilliance by the greatest poets.You are the treasure chest of knowledge, adorned with delicate and graceful words.You are the beautiful language of the gods. O Mother! Your nurturing power is completely beyond words.
संस्कृत-भावार्थस्य हिन्दी अनुवादः
संस्कृत भाषा अत्यधिक सुन्दर भाषा देव भाषा रूप से परिचित है। ऋषियों-मुनियों ने संस्कृत भाषा का विकास किया है। यह भाषा ज़्यादातर भारतीय भाषाओं की, तथा विश्व की बहुत भाषाओं की जननी (यहाँ जननी से तात्पर्य स्रोत भाषा से है) अथवा गुरुभाषा ( पूरक – भाषा) है। संस्कृत भाषा के बहुत से कवियों ने काव्यरचना से इसके सौन्दर्य को बढ़ाया। कोमल पदावली से परिपूर्ण यह ज्ञान पेटिका है। संस्कृत भाषा अपनी पदावलियों (अर्थात् शब्दों या वाक्यों से) अन्य भाषा ज्ञान और विज्ञान पोषित किया है। संस्कृत भाषा का गौरव वर्णनातीत (वर्णन से परे) है।
द्वितीयः श्लोकः
वेदव्यास- वाल्मीकि – मुनीनां
कालिदास – बाणादिकवीनाम् ।
पौराणिक – सामान्य जनानां
जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा॥२॥
पदच्छेदः
वेदव्यास – वाल्मीकि – मुनीनाम् कालिदास- बाणादिकवीनाम् पौराणिक – सामान्य जनानाम् जीवनस्य आशा सुन्दरसुरभाषा।
शब्दार्थाः
| Sanskrit (संस्कृत) | Hindi (हिंदी) | English |
|---|---|---|
| मुनीनाम् (Muninam) | मुनियों की / का / के | Of the sages |
| जनानाम् (Jananam) | लोगों की / का / के | Of the people |
| जीवनस्य (Jivanasya) | जीवन की / का / के | Of life |
| सुन्दरसुरभाषा | देवताओं की सुन्दर भाषा | Beautiful language of gods |
अन्वयः
(त्वं) वेदव्यासवाल्मीकिमुनीनां कालिदास- बाणादिकवीनां पौराणिक – सामान्यजनानां जीवनस्य आशा (असि)। त्वं सुन्दरसुरभाषा (असि ) ।
हिन्दी अनुवादः
(तुम वेदव्यास, वाल्मीकि आदि मुनियों के, कालिदास बाण आदि कवियों के पौराणिक सामन्य लोगों के जीवन की आशा हो। तुम सुन्दर सुरभाषा हो।
English Meaning
You are the hope of life for sages like Vedavyasa and Valmiki, for eminent poets like Kalidasa and Banabhatta, and for the common people of the Puranic eras. You are the beautiful, divine language of the gods.
संस्कृत-भावार्थस्य हिन्दी अनुवादः
संस्कृत भाषा बहुत सुन्दर भाषा है। वाल्मीकि, वेदव्यास आदि मुनियों ने रामायण-महाभारत-पुराण आदि ग्रन्थों की रचना की। कालिदास-बाणभट्ट आदि विशेष सम्मान प्राप्त कवियों ने भी उपयोगी काव्यों को रचा। प्राचीनकाल से लेकर अब तक सामान्य लोगों का जीवन संस्कृत भाषा से रचित काव्यों द्वारा प्रभावित है। संस्कृत भाषा बहुत लोगों के लक्ष्यों को प्राप्त कराने वाली है अतः संस्कृत भाषा सुन्दर भाषा है।
चतुर्थः श्लोकः
श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे
स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे ।
गति-मति – प्रेरक – काव्यविशारदे
तव संस्कृतिरेषा, सुन्दरसुरभाषा॥३॥
पदच्छेदः
श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे गति-मति – प्रेरककाव्यविशारदे तव संस्कृतिः एषा सुन्दरसुरभाषा।
शब्दार्थाः
| Sanskrit (संस्कृत) | Hindi (हिंदी) | English |
|---|---|---|
| श्रुतिसुखनिनदे | कर्णप्रिय ध्वनि करने वाली | Pleasing to the ears |
| सकलप्रमोदे | सबको आनन्द देने वाली | Delighting everyone |
| स्मृतिहितवरदे | स्मरणशक्ति हेतु वरदान रूप | A boon for memory |
| सरसविनोदे | मधुर विनोद करने वाली | Joyful and witty |
| काव्यविशारदे | काव्य करने में पारंगत | Expert in poetry |
| संस्कृतिरेषा | यह संस्कृति (संस्कृतिः + एषा) | This culture |
| गति-मति प्रेरक | जीवन एवं गति एवं प्रेरणा देने वाली | Inspirer of life and intellect |
अन्वयः
हे ! श्रुतिसुखनिनदे ! सकलप्रमोदे ! स्मृतिहितवरदे ! सरसविनोदे! गति-मति – प्रेरक – काव्यविशारदे ! तव एषा संस्कृतिः (अस्ति)। (त्वं) सुन्दरसुरभाषा (असि)।
हिन्दी अनुवादः
हे (संस्कृत जननी) तुम कर्णप्रिय ध्वनि करने वाली हो! सबको आनन्द देने वाली हो। तुम स्मरणशक्ति के लिए वरदान देने वाली हो। तुम मधुर विनोद करने वाली हो। गति और बुद्धि की प्रेरक हो तथा काव्यों में पारंगत हो। तुम्हारी यह संस्कृति ऐसी है। तुम देवताओं की सुन्दर भाषा हो।
English Meaning
O Mother Sanskrit, your sound is pleasing to the ears! You give delight and joy to everyone. You bestow blessings and boons upon our memory. You are the source of sweet and joyful wit. You inspire our movement and intellect, and you are an expert in poetry. Such is this glorious culture of yours. You are the beautiful language of the gods.
संस्कृत भावार्थस्य हिंदी अनुवादः
वस्तुतः रमणीय देवत्व का विधान करने वाली संस्कृत भाषा संस्कृति (culture) की माँ के समान है। संस्कृत भाषा की ध्वनि सुनने से सुख बढ़ता है। इससे सभी लोग आनन्दित होते हैं। संस्कृत भाषा वरदान के रूप में संस्कार उत्पन्न करने वाला ज्ञान देती है। यह सरस और विनोद भाव प्रकाशित करती है। मानवजीवन में उत्तम गति और बुद्धि देती है। काव्यशास्त्र से परिपूर्ण संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति की रक्षा और प्रसार करती है
चतुर्थः श्लोकः
नवरस – रुचिरालङ्कृति-धारा
वेदविषय- वेदान्त-विचारा |
वैद्य – व्योम-शास्त्रादि-विहारा
विजयते धरायां, सुन्दरसुरभाषा ॥४॥
पदच्छेदः
नवरस – रुचिरा अलङ्कृति – धारा वेदविषय- वेदान्त-विचारा। वैद्य-व्योम – शास्त्रादि – विहारा विजयते धरायाम् सुन्दरसुरभाषा।
शब्दार्थाः
| Sanskrit (संस्कृत) | Hindi (हिंदी) | English |
|---|---|---|
| रुचिरा (Ruchira) | आनन्ददायक / सुन्दर | Delightful / Pleasing |
| अलङ्कृतिधारा | अलङ्कारों को धारण करने वाली | Adorned with ornaments |
| व्योम (Vyoma) | आकाश | Sky / Space |
| विजयते (Vijayate) | विजय पाती है / सर्वोपरि है | Triumphs / Victorious |
| धरायां (Dharayam) | पृथ्वी पर | On the earth |
| विहारा | विचरण करने वाली | Roaming / Wandering |
अन्वयः
नवरस-रुचिरा अलङ्कृतिधारा वेदविषयवेदान्तविचारा वैद्यव्योमशास्त्रादिविहारा धरायां सुन्दरसुरभाषा विजयते ।
हिन्दी अनुवादः
नौ रसों से आनन्द देने वाली, अलङ्कारों को धारण करने वाली हो । वेदों के विषय, वेदान्तों के विचार वैद्य और अन्तरिक्ष के शास्त्र आदि (संस्कृतभाषा में ही ) विहार करते हैं। धरती पर देवताओं की सुन्दर भाषा विजयी है।
English Meaning
You give delight through the nine poetic rasas, and you wear literary ornaments.The subjects of the Vedas, the thoughts of Vedanta, medicine, and the sciences of outer space roam (reside) within you.The beautiful, divine language of the gods stands victorious on the earth.
संस्कृत भावार्थस्य हिन्दी अनुवादः
✨ विशेष टिप्पणी / Special Note
हिंदी (Hindi): प्रस्तुत श्लोक में कवि ने संस्कृत काव्य-शास्त्र आदि की विपुलता के विषय में बताया है। वे मुख्यतः तीन प्रकार के साहित्य की महत्ता प्रतिपादित करते हैं:
- काव्य: जो नौ रसों द्वारा पाठकगण को आनन्द देता है।
- वेद-वेदान्त: वेदों आदि में प्रतिपादित विचार, धर्म तथा दर्शन।
- शास्त्र: जो किसी एक विषय के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है (यहाँ चिकित्सा तथा खगोल ज्ञान का उल्लेख है)।
English: In this verse, the poet highlights the vastness of Sanskrit literature and sciences. The author emphasizes the greatness of three distinct categories of literature:
- Poetry (काव्य): Literature that delights readers through the expression of the nine poetic sentiments (Navarasas).
- Philosophy (वेद-वेदान्त): The spiritual thought, righteousness (Dharma), and philosophy established in the Vedas and Upanishads.
- Sciences (शास्त्र): Technical literature providing practical knowledge. Here, the poet explicitly celebrates ancient sciences like medicine and astronomy.
संस्कृत के काव्यशास्त्र (poetics ) में नौ रस विद्यमान हैं। ये हैं- शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक. वीभत्स. अद्भुत. शान्त। यह सभी रस अत्यधिक रुचिकर हैं। संस्कृत भाषा में शब्दार्थों से परिपूर्ण अनेक अलंकार (Figure of Speech) शोभा पाते हैं। वेद-उपनिषद-वेदान्त-पुराण आदि के विचार लोगों को प्रेरणा देते हैं। चिकित्सा विज्ञान-खगोल शास्त्र आदि के साथ संस्कृत भाषा पृथ्वी पर विहार करती है। इस प्रकार संस्कृत भाषा सब जगह विजयिनी होती है।
Sanskrit Deepakam class 8 chapter 7 पाठाधारित प्रश्नोत्तर (Chapter Based Question-Answers)
एकपदेन उत्तरत
1.अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत-
(क) सुन्दरसुरभाषा कस्य वचनातीता ?
उत्तर- मम (कवेः)
(ख) संस्कृतभाषा कुत्र विजयते?
उत्तर-सर्वत्र (धरायाम्)
(ग) संस्कृतभाषा कस्य आशा?
उत्तर- जीवनस्य
(घ) संस्कृते कति रसाः सन्ति?
उत्तर- नवरसाः
(ङ) कस्याः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते?
उत्तर- संस्कृतभाषायाः
पूर्णवाक्येन उत्तरत
2.अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत-
(क) संस्कृतभाषा केषां जीवनस्य आशा अस्ति?
उत्तर- संस्कृतभाषा पौराणिक-सामान्यजनानां जीवनस्य आशा अस्ति।
(ख) केषां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति?
उत्तर- वेदविषय- वेदान्तानां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति।
(ग) कैः रसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते?
उत्तर- नवरसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते।
(घ) संस्कृतभाषा केषु शास्त्रेषु विहरति?
उत्तर- संस्कृतभाषा वैद्य-व्योमशास्त्रादिषु च विहरति।
(ङ) संस्कृतभाषायाः कानि कानि सम्बोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि?
उत्तर- संस्कृतभाषायाः कृते श्रुतिसुखनिनदे! सकलप्रमोदे! स्मृतिहितवरदे! सरसविनोदे! गति-मति – प्रेरक – काव्यविशारदे! मात! इत्यादीनि संबोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि।
प्रश्ननिर्माणम्
3.रेखांकितपदानि (BOLD) आश्रित्य प्रश्निर्माणं कुरु
(क) मुनिगणाः संस्कृतभाषायाः विकासं कृतवन्तः।
प्रश्न- _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _?
(ख) सामान्यजनानां जीवनं काव्यैः प्रभावितम् अस्ति।
प्रश्न-_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _?
(ग) कवयः अपि उपादेयानि काव्यानि रचितवन्तः।
प्रश्न _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ?
(घ) संस्कृतभाषा पृथिव्यां विहरति।
प्रश्न_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ ?
(ङ) संस्कृतभाषा विविधभाषाः परिपोषयति।
प्रश्न_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _?
(च) वेद-वेदाङ्गादानि गभीराणि शास्त्राणि सन्ति।
प्रश्न _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _?
उत्तराणि
(क) मुनिगणाः कस्याः विकासं कृतवन्तः
व्याख्या– इस वाक्य में बोल्ड शब्द संस्कृतभाषायाः स्त्रीलिंग षष्ठी विभक्ति एकवचन में था। इसलिए प्रश्न बनाने के लिए “किम्” शब्द के स्त्रीलिंग रूप का षष्ठी एकवचन रूप “कस्याः” का प्रयोग किया गया है।
(ख) सामान्यजनानां जीवनं कैः प्रभावितम् अस्ति।
व्याख्या– यहाँ वाक्य में बोल्ड शब्द पुल्लिंग “काव्यः” का तृतीया बहुवचन रूप “काव्यैः” था। इसलिए यहाँ प्रश्नवाचक सर्वनाम “किम्” शब्द का पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन रूप का प्रयोग किया गया है।
(ग) कवयः अपि कीदृशानि काव्यानि रचितवन्तः।
व्याख्या – यहाँ बोल्ड शब्द उपादेयानि नपुंसकलिंग बहुवचन तथा विशेषण है। अतः यहाँ कीदृक् (कैसा) शब्द का नपुंसकलिंग बहुवचन रूप का प्रयोग हुआ है। ध्यान रखने योग्य है की जब भी प्रश्न निर्माण के लिए किसी विशेषण शब्द को रेखांकित करते हैं तो उसके स्थान पर स्त्रीलिंग के लिए कीदृशी, पुल्लिंग के लिए कीदृशः तथा नपुंसकलिंग के लिए कीदृशम् का प्रयोग करते हैं इन तीनों का मूल शब्द कीदृक् (कैसा) है।
(घ) संस्कृतभाषा कुत्र विहरति।
व्याख्या – यहाँ रेखांकित या बोल्ड शब्द पृथिव्यां सप्तमी एकवचन है, जो स्थान का द्योतक है। इसलिए यहाँ प्रश्न बनाने के लिए प्रश्नवाचक अव्यय “कुत्र” (कहाँ) का प्रयोग किया गया है।
(ङ) संस्कृतभाषा काः परिपोषयति।
व्याख्या- यहाँ बोल्ड शब्द विविधभाषा: स्त्रीलिंग, द्वितीया विभक्ति बहुवचन है। अतः प्रश्न बनाने के लिए “किम्” शब्द का स्त्रीलिंग, द्वितीया बहुवचन का रूप काः प्रयुक्त हुआ है।
(च) वेद-वेदाङ्गादानि गभीराणि कानि सन्ति।
व्याख्या- यहाँ बोल्ड शब्द शास्त्राणि नपुंसकलिंग प्रथमा विभक्ति बहुवचन है। अतः “किम्” शब्द के नपुंसकलिंग प्रथमा विभक्ति बहुवचन कानि रूप का प्रयोग हुआ है।
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