Sanskrit Swar Sandhi Class 8 With Test Paper संस्कृत स्वर संधि टेस्ट पेपर के साथ

कक्षा 8वीं के सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम में व्याकरण में Sanskrit swar sandhi (संस्कृत स्वर सन्धि) एक महत्त्वपूर्ण विषय है। परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए सन्धि के नियमों को समझना और उनका सही अभ्यास करना बेहद ज़रूरी है। इसलिए, इस पोस्ट में हमने आपकी तैयारी को आसान बनाने के लिए Sanskrit swar sandhi के सभी 5 प्रमुख भेदों के सरल नियम दे रहे हैं। साथ ही उन्हें याद रखने की एक जादुई शॉर्ट ट्रिक टेबल और अभ्यास के लिए 25 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का एक टेस्ट पेपर (MCQs Test Paper Sansktit Swar Sandi) भी है।

इस टेस्ट पेपर की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके प्रश्नों के उत्तर व्याख्या सहित सबसे अंत में दिए गए हैं। इससे आप बिना किसी मदद के खुद का मूल्यांकन कर सकेंगे। आइए, बिना समय गंवाए स्वर सन्धि के नियमों को सीखना शुरू करते हैं!

Sanskrit Swar Sandhi with Examples Class 8

Rules for Sanskrit Swar Sandhi संस्कृत स्वर संधि के नियम

1. दीर्घ स्वर सन्धि (अकः सवर्णे दीर्घः)

जब दो समान (सवर्ण) स्वर आपस में मिलते हैं, तो वे मिलकर हमेशा बड़े यानी दीर्घ स्वर हो जाते हैं। इसका सरल नियम यह है कि यदि ह्रस्व या दीर्घ ‘अ, इ, उ, ऋ’ के बाद दोबारा वही समान स्वर आए, तो दोनों के स्थान पर क्रमशः आ, ई, ऊ, ऋ हो जाता है। उदाहरण के लिए, ‘विद्या + आलयः’ मिलकर ‘विद्यालयः’ (आ + आ = आ) बनता है।

अन्य उदाहरण
📝 पुस्तकालयः = पुस्तक + आलयः (अ + आ = आ)
📝 कपीन्द्रः = कपि + इन्द्रः (इ + इ = ई)

2. गुण स्वर सन्धि (आद् गुणः)

जब ‘अ’ या ‘आ’ के बाद कोई असमान स्वर आता है, तो उनके स्थान पर गुण एकादेश हो जाता है। नियम के अनुसार, यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ/ई’ आए तो दोनों मिलकर ‘ए’ बनते हैं; यदि ‘उ/ऊ’ आए तो दोनों मिलकर ‘ओ’ बनते हैं; और यदि ‘ऋ’ आए तो दोनों मिलकर ‘अर्’ हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, ‘नर + इन्द्रः’ से ‘नरेन्द्रः’ (अ + इ = ए) बनता है।

अन्य उदाहरण:
📝 गंगोदकम् = गंगा + उदकम् (आ + उ = ओ)
📝 महर्षिः = महा + ऋषिः (आ + ऋ = अर्)

3. वृद्धि स्वर सन्धि (वृद्धिरेचि)

वृद्धि सन्धि में स्वरों की मात्राओं में वृद्धि (बढ़ोतरी) हो जाती है। इसका नियम यह है कि यदि पहले पद के अंत में ‘अ’ या ‘आ’ हो और उसके बाद ‘ए’ या ‘ऐ’ आए, तो दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप ‘ऐ’ (दो मात्राएँ) हो जाता है। इसी तरह यदि ‘ओ’ या ‘औ’ आए, तो दोनों के स्थान पर ‘औ’ हो जाता है। उदाहरण के लिए, ‘सदा + एव’ मिलकर ‘सदैव’ (आ + ए = ऐ) बनता है।

अतिरिक्त उदाहरण:
📝 तत्रैव = तत्र + एव (अ + ए = ऐ)
📝 वनौषधिः = वन + औषधिः (अ + औ = औ)

4. यण स्वर सन्धि (इको यणचि)

यण सन्धि में मात्राओं के मिलने से अक्षरों का रूप बदल जाता है और सन्धि पद में एक आधा अक्षर दिखाई देता है। नियम यह है कि यदि ‘इ/ई, उ/ऊ, ऋ’ के बाद कोई भी असमान (दूसरा) स्वर आए, तो ‘इ/ई’ का ‘य्’, ‘उ/ऊ’ का ‘व्’ और ‘ऋ’ का ‘र्’ हो जाता है। उदाहरण के लिए, ‘इति + आदि’ के मेल से ‘इत्यादि’ (इ + आ = या) बनता है।

अतिरिक्त उदाहरण:
📝 प्रत्युपकारः = प्रति + उपकारः (इ + उ = यु)
📝 अन्वयः = अनु + अयः (उ + a = व)

5. अयादि स्वर सन्धि (एचोऽयवायावः)

इस सन्धि में शब्द के बीच में मुख्य रूप से ए, ओ की मात्राएँ नहीं दिखतीं, बल्कि बोलते समय विशेष ध्वनियाँ (स्वर) सुनाई देती हैं। इसका नियम है कि यदि ‘ए, ऐ, ओ, औ’ के बाद कोई भी स्वर आए, तो ‘ए’ का ‘अय्’, ‘ऐ’ का ‘आय्’, ‘ओ’ का ‘अव्’ और ‘औ’ का ‘आव्’ हो जाता है। उदाहरण के लिए, ‘ने + अनम्’ के मेल से ‘नयनम्’ (ए + अ = अय) बनता है।

अतिरिक्त उदाहरण:
📝 नायकः = नै + अकः (ऐ + अ = आय)
📝 पावकः = पौ + अकः (औ + अ = आव)

Sanskrit Swar Sandhi Easy Tricks to Remember संस्कृत स्वर-संधि पहचानने के लिए चार्ट

नीचे हम एक चार्ट दे रहे हैं, जिसमें Sanskrit Swar Sandhi (संस्कृत स्वर संधि) को पहचानने की विधियाँ लिखी हुई हैं। यदि यह चार्ट आपके मोबाइल फ़ोन या लैपटॉप परमें पूरा न दिखे, तो इसे बाएँ से दाएँ (Left To Right) Scroll करें।

💡 स्वर सन्धि पहचानने की जादुई शॉर्ट ट्रिक (All 5 Types)

कक्षा 8वीं के स्तर पर परीक्षा में बिना समय गंवाए सन्धि की पहचान करने और सही सन्धि विच्छेद करने के लिए इस तालिका को ध्यान से समझें:

सन्धि का नाम मुख्य पहचान (शब्द के बीच में मात्रा/वर्ण) सन्धि का नियम (सरल शब्दों में) उदाहरण
1. दीर्घ स्वर सन्धि
(अकः सवर्णे दीर्घः)
शब्द के बीच में बड़ी मात्रा दिखाई देगी:
🔹 की मात्रा (ा)
🔹 की मात्रा (ी)
🔹 की मात्रा (ू)
समान स्वर आपस में मिलकर बड़े (दीर्घ) हो जाते हैं।
🔸 अ/आ + अ/आ =
🔸 इ/ई + इ/ई =
🔸 उ/ऊ + उ/ऊ =
📝 विद्या + आलयः = विद्यलयः
📝 रवि + इन्द्रः = रवन्द्रः
📝 भानु + उदयः = भानदयः
2. गुण स्वर सन्धि
(आद् गुणः)
शब्द के बीच में एक चोटी (एक मात्रा) या रेफ दिखाई देगा:
🔹 की मात्रा (े)
🔹 की मात्रा (ो)
🔹 ऊपर ‘र्’ की मात्रा (र्षि)
‘अ/आ’ के बाद अलग-अलग स्वर आने पर गुण होता है।
🔸 अ/आ + इ/ई =
🔸 अ/आ + उ/ऊ =
🔸 अ/आ + ऋ = अर्
📝 नर + इन्द्रः = नरेन्द्रः
📝 सूर्य + उदयः = सूर्योदयः
📝 देव + ऋषिः = देवर्षिः
3. वृद्धि स्वर सन्धि
(वृद्धिरेचि)
शब्द के बीच में दो चोटियाँ (दो मात्राएँ) दिखाई देंगी:
🔹 की मात्रा (ै)
🔹 की मात्रा (ौ)
‘अ/आ’ के बाद ए/ऐ या ओ/औ आने पर मात्राएँ बढ़ (वृद्धि) जाती हैं।
🔸 अ/आ + ए/ऐ =
🔸 अ/आ + ओ/औ =
📝 सदा + एव = सदैव
📝 महा + औषधम् = महौषधम्
📝 एक + एकम् = एकैकम्
4. यण स्वर सन्धि
(इको यणचि)
शब्द के बीच में य, व, र से पहले कोई आधा अक्षर (अधूरा वर्ण) आता है:
🔹 ..त् + य.. (त्य)
🔹 ..स् + व.. (स्व)
🔹 त्र (त् + र)
इ/ई, उ/ऊ, ऋ के बाद कोई भी असमान (दूसरा) स्वर आए, तो उनका रूप बदल जाता है।
🔸 इ/ई = य्
🔸 उ/ऊ = व्
🔸 ऋ = र्
📝 इति + आदि = इत्यादि
📝 सु + आगतम् = स्यवागतम्
📝 पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
5. अयादि स्वर सन्धि
(एचोऽयवायावः)
शब्द के बीच में सामान्यतः ए, ऐ, ओ, औ की मात्राएँ नहीं होतीं, बल्कि बोलते समय उच्चारण आता है:
🔹 अय / आय की ध्वनि
🔹 अव / आव की ध्वनि
ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भी स्वर आए, तो उनके स्थान पर क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाता है।
🔸 ए = अय | ऐ = आय
🔸 ओ = अव | औ = आव
📝 ने + अनम् = ननम्
📝 गै + अकः = गाकः
📝 पो + अनः = पनः
📝 पौ + अकः = पाकः

Sanskri Swar Sandhi Test Paper अभ्यास प्रश्न-पत्र

इस Test Paper में हम संस्कृत व्याकरण के ‘सन्धि’ प्रकरण से Sanskrit Swar Sandhi के महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करेंगे। पहले आप सभी 25 प्रश्नों के उत्तर अपनी कॉपी में लिख लें, और टेस्ट पूरा होने के बाद सबसे नीचे दी गई ‘उत्तरमाला (Answer Key)’ से अपने उत्तरों का मिलान करें।

भाग 1: दीर्घ सन्धि

प्रश्न 1. ‘दैत्य + अरिः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) दैतेरिः
(ख) दैत्यरिः
(ग) दैत्यारिः
(घ) दैत्यारीः

प्रश्न 2. ‘विद्या + आलयः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) विद्यालयः
(ख) विद्यालियः
(ग) विदयालयः
(घ) विद्यलयः

प्रश्न 3. ‘रवीन्द्रः’ इत्यस्य शुद्धं सन्धि विच्छेदः किम्?
(क) रवी + इन्द्रः
(ख) रवि + इन्द्रः
(ग) रवि + इंद्रः
(घ) रवी + इंद्रः

प्रश्न 4. ‘भानु + उदयः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) भानोदयः
(ख) भानूदयः
(ग) भानुदयः
(घ) भनोदयः

प्रश्न 5. ‘गिरीशः’ इत्यस्य सन्धि विच्छेदः किम्?
(क) गिर + ईशः
(ख) गिरी + शः
(ग) गिरि + ईशः
(घ) गिरि + इशः

भाग 2: गुण स्वर सन्धि

प्रश्न 6. ‘नर + इन्द्रः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) नरेन्द्रः
(ख) नरेन्दरः
(ग) नारन्द्रः
(घ) नरिन्द्रः

प्रश्न 7. ‘सूर्य + उदयः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) सूर्यौदयः
(ख) सूर्यदयः
(ग) सूर्योदयः
(घ) सूर्योधयः

प्रश्न 8. ‘देव + ऋषिः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) देवऋषिः
(ख) देवर्षिः
(ग) देवरषिः
(घ) देवर्ष

प्रश्न 9. ‘महा + ईशः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) महाशः
(ख) महिशः
(ग) महेषः
(घ) महेशः

प्रश्न 10. ‘महोदयः’ इत्यस्य सन्धिच्छेदः किम्?
(क) महा + उदयः
(ख) मह + उदयः
(ग) महो + दयः
(घ) महा + उदय

भाग 3: वृद्धि स्वर सन्धि

प्रश्न 11. ‘सदा + एव’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) सदेव
(ख) सदैव
(ग) सदैवम्
(घ) सदैव्

प्रश्न 12. ‘मम + एव’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) ममैव
(ख) ममेयम्
(ग) ममेवम्
(घ) ममव

प्रश्न 13. ‘महा + औषधम्’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) महाऔषधम्
(ख) महौशधम्
(ग) महौषधम्
(घ) महोसधम्

प्रश्न 14. ‘तव + औदार्यम्’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) तवोदार्यम्
(ख) तवौदार्यम्
(ग) तवौदारियम्
(घ) तवोदारीयम्

प्रश्न 15. ‘एक + एकम्’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) एकैकम्
(ख) एकेकम्
(ग) एकिकम्
(घ) एकोकम्

भाग 4: यण स्वर सन्धि

प्रश्न 16. ‘इति + आदि’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) इतादि
(ख) इत्यादि
(ग) इतीयादि
(घ) इत्यदि

प्रश्न 17. ‘प्रत्येकम्’ इत्यस्य शुद्धं सन्धि विच्छेदः किम्?
(क) प्रति + एकम्
(ख) प्रते + एकम्
(ग) प्रती + एकम्
(घ) प्रति + एक

प्रश्न 18. ‘सु + आगतम्’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) सुआगतम्
(ख) स्वागतम्
(ग) स्वागतम्
(घ) स्वगतम्

प्रश्न 19. ‘मध्वरिः’ इत्यस्य सन्धिच्छेदः किम्?
(क) मध + अरिः
(ख) मधू + आरिः
(ग) मधु + आरिः
(घ) मधु + अरिः

प्रश्न 20. ‘पितृ + आज्ञा’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) पितृआज्ञा
(ख) पित्राज्ञा
(ग) पित्रज्ञा
(घ) पिताआज्ञा

भाग 5: अयादि स्वर सन्धि

प्रश्न 21. ‘ने + अनम्’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) नयनम्
(ख) नायनम्
(ग) नेयनम्
(घ) नैनम्

प्रश्न 22. ‘गै + अकः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) गयकः
(ग) गायकः
(ख) गायिकः
(घ) गावकः

प्रश्न 23. ‘पो + अनः’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) पावनः
(ख) पवनः
(ग) पोवनः
(घ) पओनः

प्रश्न 24. ‘पावकः’ इत्यस्य शुद्धं सन्धि विच्छेदः किम्?
(क) पो + अकः
(ख) पौ + अकः
(ग) पाव + कः
(घ) पा + अवकः

प्रश्न 25. ‘भो + अनम्’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(क) भावनम्
(ख) भओनम्
(ग) भवनम्
(घ) भायनम्

📝 उत्तरमाला (Answer Key & Explanations) Sanskrit Swar Sandhi

छात्रों, आशा है कि आपने सभी प्रश्नों को हल कर लिया होगा। अब नीचे दिए गए सही उत्तरों से अपने जवाबों की जाँच करें:

प्रथम भाग के उत्तर – दीर्घ संधि

उत्तर 1: (ग) दैत्यारिः (व्याख्या: ‘दैत्य’ शब्द के अन्त का ‘अ’ और ‘अरि’ का प्रारम्भिक ‘अ’ मिलकर दीर्घ ‘आ’ बन जाते हैं।)

उत्तर 2: (क) विद्यालयः (व्याख्या: आ + आ के मेल से दीर्घ ‘आ’ बनता है।)

उत्तर 3: (ख) रवि + इन्द्रः (व्याख्या: रवि (इ) + इन्द्रः (इ) = रवीन्द्रः। दोनों ह्रस्व ‘इ’ मिलकर दीर्घ ‘ई’ बनाते हैं।)

उत्तर 4: (ख) भानूदयः (व्याख्या: उ + उ मिलकर दीर्घ ‘ऊ’ बन जाते हैं।)

उत्तर 5: (ग) गिरि + ईशः (व्याख्या: इ + ई के मेल से दीर्घ ‘ई’ का निर्माण होता है। यहाँ ‘गिरि’ का अर्थ पर्वत और ‘ईशः’ का अर्थ स्वामी है।)

द्वितीय भाग के उत्तर – गुण स्वर सन्धि

उत्तर 6: (क) नरेन्द्रः (व्याख्या: अ + इ के मिलने से गुण एकादेश ‘ए’ हो जाता है।)

उत्तर 7: (ग) सूर्योदयः (व्याख्या: अ + उ के मिलने से गुण एकादेश ‘ओ’ हो जाता है।)

उत्तर 8: (ख) देवर्षिः (व्याख्या: अ + ऋ मिलकर ‘अर्’ हो जाते हैं। ‘र्’ अगले वर्ण ‘षि’ के ऊपर रेफ के रूप में लग जाता है।)

उत्तर 9: (घ) महेशः (व्याख्या: आ + ई के मेल से गुण ‘ए’ बनता है।)

उत्तर 10: (क) महा + उदयः (व्याख्या: आ + उ मिलकर ‘ओ’ बनते हैं। )

तृतीय भाग के उत्तर वृद्धि स्वर सन्धि

उत्तर 11: (ख) सदैव (व्याख्या: आ + ए मिलकर वृद्धि रूप ‘ऐ’ यानी दो मात्राएँ बन जाते हैं।)

उत्तर 12: (क) ममैव (व्याख्या: अ + ए के मेल से वृद्धि ‘ऐ’ होती है।)

उत्तर 13: (ग) महौषधम् (व्याख्या: आ + औ मिलकर वृद्धि एकादेश ‘औ’ हो जाते हैं।)

उत्तर 14: (ख) तवौदार्यम् (व्याख्या: अ + औ के मेल से वृद्धि ‘औ’ हो जाती है।)

उत्तर 15: (क) एकैकम् (व्याख्या: अ + ए मिलकर वृद्धि सन्धि के नियमानुसार ‘ऐ’ बनते हैं।)

चतुर्थ भाग के उत्तर – यण स्वर सन्धि

उत्तर 16: (ख) इत्यादि (व्याख्या: इति (इ) + आदि (आ) = इत्यादि। ‘इ’ के बाद असमान स्वर ‘आ’ आने पर ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है और अगला व्यंजन आधा (त्) रह जाता है।)

उत्तर 17: (क) प्रति + एकम् (व्याख्या: प्रति में स्थित ‘इ’ और ‘एकम्’ का ‘ए’ मिलकर ‘त्ये’ बनाते हैं। ‘प्रति’ उपसर्ग में हमेशा छोटी ‘इ’ की मात्रा होती है।)

उत्तर 18: (ग) स्वागतम् (व्याख्या: सु (उ) + आगतम् (आ) = स्वागतम्। नियम के अनुसार ‘उ’ के बाद असमान स्वर आने पर ‘उ’ का ‘व्’ हो जाता है।)

उत्तर 19: (घ) मधु + अरिः (व्याख्या: मधु (उ) + अरिः (अ) = मध्वरिः। यहाँ छोटा ‘उ’ और ‘अ’ मिलकर ‘व्’ बनते हैं, जिससे ‘ध’ आधा हो जाता है।)

उत्तर 20: (ख) पित्राज्ञा (व्याख्या: पितृ (ऋ) + आज्ञा (आ) = पित्राज्ञा। यहाँ ‘ऋ’ का ‘र्’ हो जाता है, और ‘त् + र् + आ’ मिलकर ‘त्रा’ बनाते हैं।)

पञ्चम भाग के उत्तर – अयादि स्वर सन्धि

उत्तर 21: (क) नयनम् (व्याख्या: ने (ए) + अनम् (अ) = नयनम्। नियम के अनुसार ‘ए’ के बाद स्वर आने पर ‘ए’ का ‘अय्’ हो जाता है।)

उत्तर 22: (ग) गायकः (व्याख्या: गै (ऐ) + अकः (अ) = गायकः। ‘ऐ’ के बाद कोई स्वर आने पर ‘ऐ’ का ‘आय्’ हो जाता है।)

उत्तर 23: (ख) पवनः (व्याख्या: पो (ओ) + अनः (अ) = पवनः। ‘ओ’ के बाद स्वर होने के कारण ‘ओ’ का ‘अव्’ हो जाता है।)

उत्तर 24: (ख) पौ + अकः (व्याख्या: पौ (औ) + अकः (अ) = पावकः। जब शब्द में ‘आव’ की ध्वनि (पावक) सुनाई दे, तो पहले पद में ‘औ’ की मात्रा आती है।)

उत्तर 25: (ग) भवनम् (व्याख्या: भो (ओ) + अनम् (अ) = भवनम्। यहाँ ‘ओ’ का ‘अव्’ आदेश हुआ है।)

अन्त में

आज के इस ऑनलाइन टेस्ट और क्विक रिवीज़न नोट्स के माध्यम से हमने संस्कृत व्याकरण के एक बेहद महत्वपूर्ण भाग ‘स्वर सन्धि’ के सभी 5 प्रमुख भेदों (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि) को विस्तार से समझा। सन्धि के नियमों को समझने की कोशिश कीजिए न कि रटने की। आप ऊपर दी गई जादुई शॉर्ट ट्रिक तालिका (Table) को 1-2 बार ध्यान से देख लीजिए। ऐसा करने से परीक्षा में आपका कोई भी प्रश्न कभी गलत नहीं होगा।

नियमित रूप से ऐसे ही अभ्यास प्रश्नों (MCQs) और सरल नोट्स के माध्यम से अपनी संस्कृत की तैयारी को मजबूत करने के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करना न भूलें। इस टेस्ट पेपर या नियमों को लेकर आपके मन में कोई भी शंका (Doubt) है, तो नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर पूछें।

इस पोस्ट को डाउनलोड करने के लिए आपके पास तीन विकल्प हैं। आप इस पोस्ट को नियम, टेस्ट और उत्तर के साथ पूरा डाउनलोड कर सकते हैं। ध्यान रहे पोस्ट में दिए गए संधि को पहचानने के क्विक टिप्स डाउनलोड नहीं होंगे। आप सिर्फ टेस्ट पेपर डाउनलोड कर सकते हैं। आप टेस्ट पेपर और उत्तर साथ में डाउनलोड सकते हैं। इन तीनों ही तरीकों के लिए डाउनलोड बटन नीचे दिए गए हैं।

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