संस्कृत संख्या (Sanskrit Numbers)कक्षा 6 से लेकर 8 तक के अतिरिक्त अन्य छात्रों के लिए भी महत्त्वपूर्ण विषय है। इस पोस्ट में एक से लेकर सौ तक संस्कृत संख्या (Sanskrit Numbers)शब्दों में दी गई है। इन्हें हिंदी अंक, अरेबिक गिनती और अंग्रेजी के शब्दों में भी दिया गया है। इससे अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को इसे समझने में आसानी होगी।
संस्कृत संख्या सम्बन्धी कुछ महत्त्वपूर्ण बिंदु (Important Points to Remember)
संस्कृत संख्याओं को पढ़ते समय या परीक्षाओं में उनसे जुड़े प्रश्नों को हल करते समय कुछ विशेष बिंदुओं का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है, जिससे गलतियों की संभावना शून्य हो जाती है:
लिंग भेद का ध्यान रखें (संख्या १ से ४)
संस्कृत में 1 से 4 तक की संख्याओं के रूप तीनों लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग) में अलग-अलग चलते हैं। परीक्षा में विशेष्य (Noun) के लिंग को देखकर ही सही संख्या रूप चुनें; जैसे— ‘एकः बालकः’ (पुल्लिंग), ‘एका बालिका’ (स्त्रीलिंग), और ‘एकम् फलम्’ (नपंसकलिंग)। संख्या 5 और उससे आगे की सभी संख्याएँ तीनों लिंगों में समान रहती हैं। एक से चार तक की प्रत्येक लिंग की संख्याओं और उनके उदाहरणों को किसी अन्य पोस्ट में देखेंगे।
‘एकोन’ (ऊन) नियम को समझें
9 वाली संख्याओं (जैसे 19, 29, 39 आदि) को संस्कृत में दो तरह से लिखा जाता है। एक सामान्य विधि (जैसे नवदश = 19) और दूसरी ‘एकोन’ विधि, जिसका अर्थ है ‘एक कम‘ (एक= एक एवं ऊन=कम) जैसे एकोनविंशतिः = 20 में एक कम यानी 19। परीक्षा में अक्सर ‘एकोन‘ वाले रूप ही पूछे जाते हैं, इसलिए अगले दशक के नाम को ध्यान में रखकर इसे ध्यान से हल करें।
संधि नियमों और वर्तनी (Spelling) की शुद्धता
संख्याओं को जोड़ते समय संस्कृत के संधि नियमों के कारण शब्दों के रूप बदल जाते हैं; जैसे 40 को ‘चत्वारिंशत्’ कहते हैं, लेकिन 43 को ‘त्रिचत्वारिंशत्‘ या ‘त्रयश्चत्वारिंशत्’ दोनों लिखा जा सकता है। इसी तरह 44 में ‘चतुश्चत्वारिंशत्‘ (शकार का आगमन) हो जाता है। परीक्षा में ऐसी छोटी वर्तनी संबंधी अशुद्धियों और हलन्त (जैसे- त्रिंशत्, चत्वारिंशत् के अंत में ‘त्’) पर विशेष ध्यान दें।
क्रम सूचक और आवृत्ति सूचक शब्दों में अंतर
सामान्य गिनती (एक, द्वि, त्रि) और क्रम बताने वाली गिनती (प्रथमः (First) द्वितीयः (Second), तृतीयः (Third) ( यानी पहला, दूसरा, तीसरा) में अंतर होता है। परीक्षा के प्रश्न में यह ध्यान से पढ़ें कि साधारण संख्या पूछी गई है या किसी का स्थान/क्रम पूछा जा रहा है।
संस्कृत संख्या तालिकाएं

नीचे एक से लेकर सौ तक की गिनती छः तालिकाओं में दी गई हैं। पहली तालिका में एक से चार तक की संख्याएँ तीनों लिंगों में दी गई हैं। तालिका में एक से बीस (1 to 20) तक की संस्कृत संख्या है। तीसरी में इक्कीस से चालीस (21 to 40) तक। इसी प्रकार प्रत्येक तालिका में बीस संख्याएँ हैं। ऐसा छात्रों की सुविधा के लिए किया गया है। ऊपर Table of Content पर क्लिक करके आप मनचाही गिनती की तालिका तक पहुँच सकते हैं।
१. संख्या १ से ४ का लिंग भेद (Gender in Sanskrit Numbers 1 to 4)
संस्कृत संख्या में एक से चार तक की गिनती “संख्या विशेषण” कहलाती हैं। अर्थात् ये जिन शब्दों के साथ प्रयोग होती हैं, इनका लिंग विभक्ति और वचन उनके अनुसार ही होता है। उदाहरण के लिए यदि वाक्य है कि ‘एक लड़का विद्यालय जाता है’ तो उसका संस्कृत अनुवाद होगा “एकः बालकः विद्यालयं गच्छति।” यहाँ बालक शब्द पुल्लिंग, एकवचन और प्रथमा विभक्ति में है इसलिए इसके साथ आई एक संख्या भी पुल्लिंग एवं प्रथमा विभक्ति में है। इसी प्रकार ‘शिक्षकः द्वौ बालकौ प्रश्नं पृच्छति’ उदाहरण में बालकौ पद पुल्लिंग, द्वितीया विभक्ति, द्विवचन में है। इसलिए संख्या दो का भी विभक्ति वचन और लिंग उसके अनुसार है।
ध्यातव्य
एक से लेकर चार तक की संख्याओं के सातों विभक्तियों में रूप होते हैं। विशेषता यह होती है कि एक (एक) संख्या के रूप सदा एकवचनान्त, दो (द्वि) संख्या का रूप सदा द्विवचनान्त और तीन (त्रि) और चार (चतुः) के’ रूप सदा बहुवचनांत होते हैं।
इस विषय को और अधिक स्पष्ट रूप में समझने के लिए आप विकिपीडिया के इस पेज पर जा सकते हैं – संस्कृत की गिनती
| अंक /हिन्दी/ मूलरूप | पुल्लिंग (Masculine) | स्त्रीलिंग (Feminine) | नपुंसकलिंग (Neuter) | उदाहरण (Example) |
|---|---|---|---|---|
| 1 (एक) (एक) | एकः | एका | एकम् | एकः बालकः / एका बालिका / एकम् फलम् |
| 2 (दो) (द्वि) | द्वौ | द्वे | द्वे | द्वौ बालकौ / द्वे बालिके / द्वे फले |
| 3 (तीन) (त्रि) | त्रयः | तिस्रः | त्रीणि | त्रयः बालकाः / तिस्रः बालिकाः / त्रीणि फलानि |
| 4 (चार) (चतुः) | चत्वारः | चतस्रः | चत्वारि | चत्वारः बालकाः / चतस्रः बालिकाः / चत्वारि फलानि |
💡 ध्यान दें (नोट):
- जैसा कि आप तालिका में देख सकते हैं, संख्या २ (दो) के रूप स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग दोनों में बिल्कुल एक समान (द्वे) होते हैं। इसलिए आपको प्रश्न हल करते समय यह ध्यान रखना होगा कि इसके साथ आया शब्द किस लिंग का है।
- संख्या ५ (पञ्च) और उससे आगे की सभी संख्याएँ सभी लिंगों के लिए एक जैसी ही रहती हैं, इसलिए केवल ४ तक ही यह अलग तालिका बनाई जाती है।
२. संस्कृत संख्या १ से २० तक (Sanskrit Numbers 1 to 20)
इस तालिका में एक से बीस तक की संख्या दी गई है। CBSE एवं अन्य बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 6 एवं 7 में अक्सर बीस तक की गिनती ही पूछी जाती है। छात्र इसे ठीक से समझ सकें इसलिए संख्याओं को अंग्रेजी भाषा में भी लिख दिया गया है।
| हिंदी / संस्कृत अंक | संस्कृत शब्द (Devanagari) | अंग्रेजी अंक (Digits) | अंग्रेजी शब्द (In Words) |
|---|---|---|---|
| १ | एकम् | 1 | One |
| २ | द्वे | 2 | Two |
| ३ | त्रीणि | 3 | Three |
| ४ | चत्वारी | 4 | Four |
| ५ | पञ्च | 5 | Five |
| ६ | षट् | 6 | Six |
| ७ | सप्त | 7 | Seven |
| ८ | अष्ट | 8 | Eight |
| ९ | नव | 9 | Nine |
| १० | दश | 10 | Ten |
| ११ | एकादश | 11 | Eleven |
| १२ | द्वादश | 12 | Twelve |
| १३ | त्रयोदश | 13 | Thirteen |
| १४ | चतुर्दश | 14 | Fourteen |
| १५ | पञ्चदश | 15 | Fifteen |
| १६ | षोडश | 16 | Sixteen |
| १७ | सप्तदश | 17 | Seventeen |
| १८ | अष्टादश | 18 | Eighteen |
| १९ | नवदश / एकोनविंशतिः | 19 | Nineteen |
| २० | विंशतिः | 20 | Twenty |
३. संस्कृत संख्या २१ से ४० तक (Sanskrit Numbers 21 to 40)
इस तालिका में कक्षा 8 के पाठ्यक्रम के अनुसार बीस से आगे की गिनती भी दी गई है। कुछ बोर्ड्स में कक्षा 8 के छात्र पचास तक गिनती पढ़ते हैं। कुछ स्थानों पर पूरी सौ संख्याएँ याद करवा दी जाती हैं।
| हिंदी / संस्कृत अंक | संस्कृत शब्द (Devanagari) | अंग्रेजी अंक (Digits) | अंग्रेजी शब्द (In Words) |
|---|---|---|---|
| २१ | एकविंशतिः | 21 | Twenty-one |
| २२ | द्वाविंशतिः | 22 | Twenty-two |
| २३ | त्रयोविंशतिः | 23 | Twenty-three |
| २४ | चतुर्विंशतिः | 24 | Twenty-four |
| २५ | पञ्चविंशतिः | 25 | Twenty-five |
| २६ | षड्विंशतिः | 26 | Twenty-six |
| २७ | सप्तविंशतिः | 27 | Twenty-seven |
| २८ | अष्टाविंशतिः | 28 | Twenty-eight |
| २९ | नवविंशतिः | 29 | Twenty-nine |
| ३० | त्रिंशत् | 30 | Thirty |
| ३१ | एकत्रिंशत् | 31 | Thirty-one |
| ३२ | द्वात्रिंशत् | 32 | Thirty-two |
| ३३ | त्रयस्त्रिंशत् | 33 | Thirty-three |
| ३४ | चतुस्त्रिंशत् | 34 | Thirty-four |
| ३५ | पञ्चत्रिंशत् | 35 | Thirty-five |
| ३६ | षट्त्रिंशत् | 36 | Thirty-six |
| ३७ | सप्तत्रिंशत् | 37 | Thirty-seven |
| ३८ | अष्टात्रिंशत् | 38 | Thirty-eight |
| ३९ | नवत्रिंशत् / एकोनचत्वारिंशत् | 39 | Thirty-nine |
| ४० | चत्वारिंशत् | 40 | Forty |
४. संख्या ४१ से ६० तक (Sanskrit Numbers 41 to 60)
इस तालिका में 41 से लेकर 60 तक की संस्कृत संख्याएँ दी गई हैं। ये संख्याएँ सामान्य ज्ञान के लिए और टीचिंग परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्रों के लिए उपयोगी हैं।
| हिंदी / संस्कृत अंक | संस्कृत शब्द (Devanagari) | अंग्रेजी अंक (Digits) | अंग्रेजी शब्द (In Words) |
|---|---|---|---|
| ४१ | एकचत्वारिंशत् | 41 | Forty-one |
| ४२ | द्विचत्वारिंशत् | 42 | Forty-two |
| ४३ | त्रिचत्वारिंशत् | 43 | Forty-three |
| ४४ | चतुश्चत्वारिंशत् | 44 | Forty-four |
| ४५ | पञ्चचत्वारिंशत् | 45 | Forty-five |
| ४६ | षट्चत्वारिंशत् | 46 | Forty-six |
| ४७ | सप्तचत्वारिंशत् | 47 | Forty-seven |
| ४८ | अष्टचत्वारिंशत् | 48 | Forty-eight |
| ४९ | नवचत्वारिंशत् / एकोनपञ्चाशत् | 49 | Forty-nine |
| ५० | पञ्चाशत् | 50 | Fifty |
| ५१ | एकपञ्चाशत् | 51 | Fifty-one |
| ५२ | द्विपञ्चाशत् | 52 | Fifty-two |
| ५३ | त्रिपञ्चाशत् | 53 | Fifty-three |
| ५४ | चतुःपञ्चाशत् | 54 | Fifty-four |
| ५५ | पञ्चपञ्चाशत् | 55 | Fifty-five |
| ५६ | षट्पञ्चाशत् | 56 | Fifty-six |
| ५७ | सप्तपञ्चाशत् | 57 | Fifty-seven |
| ५८ | अष्टपञ्चाशत् | 58 | Fifty-eight |
| ५९ | नवपञ्चाशत् / ऊनषष्टिः | 59 | Fifty-nine |
| ६० | षष्टिः | 60 | Sixty |
५. संस्कृत गिनती ६१ से ८० तक (Sanskrit Numbers 61 to 80)
इस तालिका में 61 से लेकर 80 तक बीस संख्याएँ दी गई हैं। संख्याओं की सुविधा के लिए तालिका छोटी रखी गई है।
| हिंदी / संस्कृत अंक | संस्कृत शब्द (Devanagari) | अंग्रेजी अंक (Digits) | अंग्रेजी शब्द (In Words) |
|---|---|---|---|
| ६१ | एकषष्टिः | 61 | Sixty-one |
| ६२ | द्विषष्टिः / द्वाषष्टिः | 62 | Sixty-two |
| ६३ | त्रिषष्टिः | 63 | Sixty-three |
| ६४ | चतुःषष्टिः | 64 | Sixty-four |
| ६५ | पञ्चषष्टिः | 65 | Sixty-five |
| ६६ | षट्षष्टिः | 66 | Sixty-six |
| ६७ | सप्तषष्टिः | 67 | Sixty-seven |
| ६८ | अष्टषष्टिः | 68 | Sixty-eight |
| ६९ | नवषष्टिः / एकोनसप्ततिः | 69 | Sixty-nine |
| ७० | सप्ततिः | 70 | Seventy |
| ७१ | एकसप्ततिः | 71 | Seventy-one |
| ७२ | द्विसप्ततिः | 72 | Seventy-two |
| ७३ | त्रिसप्ततिः | 73 | Seventy-three |
| ७४ | चतुःसप्ततिः | 74 | Seventy-four |
| ७५ | पञ्चसप्ततिः | 75 | Seventy-five |
| ७६ | षट्सप्ततिः | 76 | Seventy-six |
| ७७ | सप्तसप्ततिः | 77 | Seventy-seven |
| ७८ | अष्टसप्ततिः | 78 | Seventy-eight |
| ७९ | नवसप्ततिः / एकोनअशीतिः | 79 | Seventy-nine |
| ८० | अशीतिः | 80 | Eighty |
६. संस्कृत गिनती ८१ से १०० तक (Sanskrit Numbers 81 to 100)
इस तालिका में 81 से 100 तक की गिनती दी गई है। यह संख्या ज्ञान REET, CTET, या स्कूल एग्जाम्स के लिए भी उपयोगी हैं।
| हिंदी / संस्कृत अंक | संस्कृत शब्द (Devanagari) | अंग्रेजी अंक (Digits) | अंग्रेजी शब्द (In Words) |
|---|---|---|---|
| ८१ | एकाशीतिः | 81 | Eighty-one |
| ८२ | द्व्यशीतिः | 82 | Eighty-two |
| ८३ | त्र्यशीतिः | 83 | Eighty-three |
| ८४ | चतुरशीतिः | 84 | Eighty-four |
| ८५ | पञ्चाशीतिः | 85 | Eighty-five |
| ८६ | षडशीतिः | 86 | Eighty-six |
| ८७ | सप्ताशीतिः | 87 | Eighty-seven |
| ८८ | अष्टाशीतिः | 88 | Eighty-eight |
| ८९ | नवाशीतिः / एकोननवतिः | 89 | Eighty-nine |
| ९० | नवतिः | 90 | Ninety |
| ९१ | एकनवतिः | 91 | Ninety-one |
| ९२ | द्विनवतिः / द्वानवतिः | 92 | Ninety-two |
| ९३ | त्रिनवतिः / त्रयोनवतिः | 93 | Ninety-three |
| ९४ | चतुर्नवतिः | 94 | Ninety-four |
| ९५ | पञ्चनवतिः | 95 | Ninety-five |
| ९६ | षण्णवतिः | 96 | Ninety-six |
| ९७ | सप्तनवतिः | 97 | Ninety-seven |
| ९८ | अष्टनवतिः | 98 | Ninety-eight |
| ९९ | नवनवतिः / एकोनशतम् | 99 | Ninety-nine |
| १०० | शतम् / एकशतम् | 100 | One hundred |
१०० से आगे की बड़ी संस्कृत संख्याएँ (Sanskrit Numbers Above 100)
संस्कृत में १०० से आगे की गिनती लिखना बहुत वैज्ञानिक है। इसमें मूल संख्या के आगे ‘अधिक’ जोड़ दिया जाता है। जैसे १०१ को ‘एकाधिकशतम्’ कहते हैं, जिसका अर्थ है शतम् (१००) से एक अधिक।
| गणितीय अंक (English) | भारतीय मान (Indian Value) | संस्कृत शब्द (Devanagari) | उच्चारण (Pronunciation) |
|---|---|---|---|
| 100 | सौ (Hundred) | शतम् | Shatam |
| 101 | एक सौ एक (101) | एकाधिकशतम् / एकोत्तरशतम् | Ekadhika-shatam |
| 102 | एक सौ दो (102) | द्व्यधिकशतम् / द्व्युत्तरशतम् | Dvyadhika-shatam |
| 105 | एक सौ पाँच (105) | पञ्चाधिकशतम् | Panchadhika-shatam |
| 120 | एक सौ बीस (120) | विंशत्यधिकशतम् | Vimshatyadhika-shatam |
| 200 | दो सौ (Two Hundred) | द्विशतम् | Dvishatam |
| 1,000 | एक हजार (One Thousand) | सहस्रम् | Sahasram |
| 10,000 | दस हजार (Ten Thousand) | अयुतम् | Ayutam |
| 1,00,000 | एक लाख (One Lakh) | लक्षम् | Laksham |
| 10,00,000 | दस लाख (Ten Lakhs) | नियुतम् / प्रयुतम् | Niyutam / Prayutam |
| 1,00,00,000 | एक करोड़ (One Crore) | कोटिः | Kotih |
निष्कर्ष
इस लेख में हमने संस्कृत में १ से १०० तक की गिनती (Sanskrit Numbers 1 to 100) को हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद के साथ बेहद आसान भागों में सीखा। संस्कृत भाषा में संख्याओं का अपना एक वैज्ञानिक और व्याकरणिक महत्व है। शुरुआत में १ से ४ तक के लिंग भेद और ‘एकॉन’ (जैसे एकोनविंशतिः) जैसे नियम थोड़े कठिन लग सकते हैं, लेकिन नियमित अभ्यास और इस तालिका की मदद से छात्र और नए शिक्षार्थी इसे बहुत आसानी से याद रख सकते हैं।
यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा (जैसे REET, CTET, या स्कूल एग्जाम्स) की तैयारी कर रहे हैं, तो इन संख्याओं को लिखकर अभ्यास करना सबसे बेहतर तरीका है। हमें उम्मीद है कि यह मार्गदर्शिका आपके लिए उपयोगी सिद्ध हुई होगी।
संस्कृत संख्या के विषय में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
उत्तर: संस्कृत में 1 से 4 तक की संख्याओं के रूप विशेष्य (Noun) के लिंग के अनुसार बदल जाते हैं। उदाहरण के लिए, 1 को पुल्लिंग में ‘एकः’, स्त्रीलिंग में ‘एका’ और नपुंसकलिंग में ‘एकम्’ कहा जाता है। 5 और उससे आगे की सभी संख्याएँ सभी लिंगों में एक समान रहती हैं।
उत्तर: ‘एकोनविंशतिः’ दो शब्दों से मिलकर बना है— एकोन (एक कम) + विंशतिः (बीस)। इसका शाब्दिक अर्थ है ‘बीस में एक कम’ यानी 19। संस्कृत में 9 वाले अंकों (19, 29, 39 आदि) को दर्शाने के लिए इस नियम का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर: संस्कृत में 50 को पञ्चाशत्, 80 को अशीतिः और 100 को शतम् या एकशतम् कहा जाता है।
उत्तर: नहीं, संख्या 5 (पञ्च) और उसके बाद की सभी संख्याएँ (100 या उससे आगे तक) तीनों लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) में बिल्कुल एक समान रहती हैं। इनमें कोई बदलाव नहीं होता।
उत्तर: परीक्षा में सबसे ज्यादा ध्यान शब्दों के अंत में आने वाले हलन्त (त्) और विसर्ग पर देना चाहिए (जैसे: त्रिंशत्, चत्वारिंशत्)। इसके अलावा प्रश्न में दिए गए संज्ञा शब्द का लिंग पहचानकर ही 1 से 4 तक की सही संख्या का चुनाव करना चाहिए।
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