परिचय
अक्सर स्कूली स्तर पर विद्यार्थियों को धातु रूप याद करने और उन्हें रटने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। लकारों के बदलने के साथ रूपों में होने वाले परिवर्तनों के कारण छात्र अक्सर भ्रमित (Confused) हो जाते हैं। विद्यार्थियों की इसी समस्या को सरल बनाने के लिए आज के इस लेख में रूप याद करने की कुछ Sanskrit dhatu roop tricks दी गई हैं। इन Short Tricks की सहायता से आप किसी भी धातु का रूप कुछ मिनटों में खुद ही बना लेंगे।
कक्षा 6 के नवीनतम पाठ्यक्रम और छात्रों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखते हुए इस संपूर्ण पोस्ट में हम निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर क्रमानुसार चर्चा करेंगे:
- धातु का सामान्य परिचय: धातु किसे कहते हैं और क्रिया के मूल रूप से इसका क्या संबंध है?
- लकार की अवधारणा: काल (Tense) को संस्कृत में लकार क्यों कहा जाता है?
- पुरुष और वचन (Person & Number): इंग्लिश ग्रामर की तुलनात्मक पद्धति से इनका विस्तृत परिचय।
- परिवर्तनीय और अपरिवर्तनीय धातुएँ: रूप परिवर्तन के नियमों के आधार पर धातुओं का वर्गीकरण।
- Sanskrit Dhatu Roop Tricks: लट्, लङ्, लृट्, लोट और विधिलिंङ् लकारों को याद करने के अचूक सूत्र
Sanskrit Dhatu Roop Tricks पर यह लेख न केवल विद्यार्थियों के संशयों को दूर करेगा, बल्कि परीक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने में भी उनका मार्गदर्शन करेगा।
Introduction to Sanskrit Dhatu Roop Tricks
Often at the school level, Sanskrit students face a lot of difficulty in memorising and rote-learning Dhatu Roop. Due to the changes that occur in forms when changing across lakars (tenses), students frequently get confused. To simplify this exact problem for students, this article provides some Sanskrit dhatu roop tricks to remember them easily. With the help of these short tricks, you will be able to construct any verb form on your own within a few minutes.
Keeping in mind the latest syllabus for Class 6 and the mental level of the students, we will discuss the following key points in order throughout this entire post:
- General Introduction to Dhatu: What is a dhatu, and how is it related to the root form of a verb?
- The Concept of Lakar: Why is a tense called a ‘lakar’ in Sanskrit?
- Person and Number (Purusha & Vachana): A detailed introduction to these concepts using a comparative approach with English grammar.
- Changing and Unchanging Verbs (Parivartaniya & Aparivartaniya Dhatu): Classification of verbs based on the rules of form modification.
- Sanskrit Dhatu Roop Tricks: Infallible formulas to memorise Lat, Lang, Lrit, Lot, and Vidhilining lakars.
This article will not only clear all doubts of the students but will also guide them toward scoring excellent marks in their exams. Let us begin understanding the topic in a very simple and systematic manner.
धातु किसे कहते हैं (What is Dhatu (Root)
जब हम हिंदी या अंग्रेजी भाषा पढ़ते हैं, तो हम बहुत सारे काम वाले शब्द देखते हैं। जैसे—पढ़ना (Read), लिखना (Write), जाना (Go) आदि। इन काम वाले शब्दों को व्याकरण में ‘क्रिया’ (Verb) कहा जाता है।
संस्कृत भाषा में इन्हीं क्रियाओं (काम वाले शब्दों) के मूल रूप (Original Form) को धातु (Dhatu) कहते हैं। इसे अंग्रेजी में Root कहते हैं।
सरल शब्दों में कहें तो: “जिस शब्द से किसी काम के करने या होने का पता चलता है, उसे क्रिया कहते हैं। क्रिया के मूल रूप को संस्कृत में धातु कहते हैं।”
संस्कृत में एक नियम है कि क्रिया के मूल रूप यानि धातु का ज्यों का त्यों वाक्य में प्रयोग नहीं होता। वाक्य में प्रयोग करने के लिए उसमें कुछ प्रत्यय (suffix) लगाकर रूप बनाते हैं।
उदाहरण से समझें:
हम क्रिया के रूप में ‘पठति’ (वह पढ़ता है) को लेते हैं। इसमें मुख्य काम क्या हो रहा है? ‘पढ़ना’। इस ‘पढ़ना’ काम के लिए संस्कृत में जो मूल शब्द इस्तेमाल होता है, वह है ‘पठ्’।
इसी ‘पठ्’ को हम धातु कहते हैं।
- पठ् (मूल धातु) + ति (प्रत्यय) = पठति (क्रिया रूप)
आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि जैसे अंग्रेजी में Present Tense में Go जैसी क्रियाओं के साथ s, es या ing जोड़ते हैं, वैसे ही संस्कृत में भी। बस संस्कृत में ये प्रत्यय तीन पुरुष और तीन वचन के अनुसार 9 होते हैं
Understanding Dhatu and Verbs
When we read Hindi or English, we see a lot of action words. For example—to read, to write, to go, etc. In grammar, these action words are called ‘Verbs’.
In the Sanskrit language, the original form (root form) of these verbs (action words) is called a Dhatu. In English, it is referred to as the Root (or Verbal Root).
To put it in simple words: “A word that indicates the doing or happening of an action is called a Verb. The root form of a verb is called a Dhatu in Sanskrit.”
There is a rule in Sanskrit that the root form of a verb—that is, the Dhatu—cannot be used as it is in a sentence. To use it in a sentence, certain suffixes (pratyaya) are added to form the final verb.
Let’s understand with an example:
‘Pathati‘ (which means—he/she reads), what is the main action happening here? ‘Reading’. The root word used in Sanskrit for this action of ‘reading’ is ‘Path‘.
It is this ‘Path‘ that we call a Dhatu.
- Path (Root / Dhatu) + Ti (Suffix) = Pathati (Verb Form)
You can also understand it this way: just like we add ‘s’, ‘es’, or ‘ing’ to verbs like ‘Go’ in the English Present Tense, we do something similar in Sanskrit. The only difference is that in Sanskrit, these suffixes are 9 in total, varying according to the three persons (Purusha) and three numbers (Vachana).
कुछ प्रमुख धातुएँ और उनके अर्थ
कक्षा 6, 7 और 8 में प्रयुक्त होने वाली प्रमुख धातुएँ निम्नलिखित हैं-
अपरिवर्तनीय धातुएँ
- लिख् = लिखना (To Write)
- गम् (गच्छ) = जाना (To Go)
- हस = हँसना (To Laugh)
- चल = चलना (To Walk)
- खाद = खाना (To Eat)
- क्रीड् = खेलना (To Play)
- पठ् | पढ़ना | To Read
- लिख् | लिखना | To Write
- चल् | चलना | To Walk / Move
- हस् | हँसना | To Laugh
- खाद् | खाना | To Eat
- खेल् | खेलना | To Play
- वद् | बोलना | To Speak
- नम् | नमस्कार करना | To Bow / Salute
- धाव् | दौड़ना | To Run
- रक्ष् | रक्षा करना | To Protect
- कूर्द् | कूदना | To Jump
- पत् | गिरना | To Fall
- भ्रम् | घूमना | To Wander / Roam
- कूज् | चहकना | To Chirp
- विकस् | खिलना | To Bloom
परिवर्तनीय धातुएँ
- पा (पिब्) = पीना (To Drink)
- गम् (गच्छ्) = जाना (To Go)
- स्था (तिष्ठ्) = बैठना / ठहरना (To Sit / Stay)
- दृश् (पश्य्) = देखना (To See)
- भू (भव्) = होना (To Be / Become)
- घ्रा (जिघ्र्) = सूँघना (To Smell)
- गै (गाय्) = गाना (To Sing)
- नृत् (नृत्य्) = नाचना (To Dance)
- तृ (तर) = तैरना (To Swim)
- त्यज् (त्यज्) = छोड़ना (To Leave / Abandon)
- प्रच्छ् (पृच्छ्) = पूछना (To Ask)
- नी (नय्) = ले जाना (To Take / Lead)
- हृ (हर्) = चुराना / हरण करना (To Steal / Rob)
- क्रुध् (क्रुध्य्) = गुस्सा करना (To Get Angry)
धातु के बारे में कुछ ज़रूरी बातें (Important Points Regarding Dhatu)
- धातु चिह्न (√): संस्कृत व्याकरण में धातु को दिखाने के लिए रूट या करणी के चिह्न ‘√‘ का प्रयोग किया जाता है। जैसे— √पठ्, √लिख्।
- हलन्त (्) का नियम: धातुओं के आख़िरी अक्षर के नीचे हमेशा एक तिरछी रेखा लगी होती है जिसे ‘हलन्त’ कहते हैं (जैसे- पठ्, लिख्)। इसका मतलब होता है कि वह अक्षर आधा है। जब इसमें प्रत्यय जुड़ते हैं, तब यह पूरा अक्षर बनता है।
- पुरुष और वचन: संस्कृत में धातु के रूप 3 पुरुषों (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और 3 वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में चलते हैं, जिसके बारे में हमने लकारों की ट्रिक में सीखेंगे।
लकार किसे कहते हैं?
जैसे हम हिंदी में ‘काल’ (समय) और अंग्रेजी में ‘Tense’ पढ़ते हैं, ठीक वैसे ही संस्कृत में काल या समय को ‘लकार’ कहा जाता है।
लकार हमें यह बताता है कि कोई काम किस समय में हो रहा है—वह काम बीत चुके समय (Past Tense) में हुआ था, अभी चल रहे समय (Present Tense) में हो रहा है, या आने वाले समय (Future Tense) में होगा। इसके अलावा, आज्ञा देने या सलाह देने के लिए भी अलग-अलग लकारों का प्रयोग किया जाता है।
चूँकि संस्कृत में इन सभी कालों के नाम ‘ल’ अक्षर से शुरू होते हैं (जैसे- लट् लकार, लङ् लकार, लृट् लकार), इसीलिए इन्हें सामूहिक रूप से ‘लकार’ कहा जाता है।
What is Lakar
Just as we study ‘Kaal‘ in Hindi and ‘Tense‘ in English, similarly, tense or time in Sanskrit is called ‘Lakar‘.
A Lakar tells us the time at which an action takes place—whether that action happened in the past (Past Tense), is happening in the current time (Present Tense), or will happen in the time to come (Future Tense). Apart from this, different Lakars are also used to give orders or advice.
Since the names of all these tenses in Sanskrit begin with the letter ‘L‘ (such as Lat Lakar, Lang Lakar, Lrit Lakar), they are collectively called ‘Lakar‘.
पाँचों लकारों का संक्षिप्त परिचय (Five Chief Lakar at a Glance)
कक्षा 6 से 8 के पाठ्यक्रम के अनुसार, हमें मुख्य रूप से निम्नलिखित 5 लकारों के बारे में पढ़ना और समझना होता है:
1. लट् लकार (Present Tense – वर्तमान काल)
- इस लकार का प्रयोग उस काम के लिए होता है जो अभी चल रहे समय में हो रहा है।
- उदाहरण: पठति (वह पढ़ता है)।
2. लङ् लकार (Past Tense – भूतकाल)
- भूतकाल (Past Tense) के लिए इस लकार का प्रयोग होता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि धातु के आगे ‘अ’ जुड़ता है।
- उदाहरण: अपठत् (उसने पढ़ा / वह पढ़ता था)।
3. लृट् लकार (Future Tense – भविष्यत काल)
- भविष्यत् काल (आने वाले समय में होने वाले काम के लिए इस लकार का प्रयोग है। इसमें धातु के पीछे ‘स्य’ या ‘इष्य’ जुड़ता है।
- उदाहरण: पठिष्यति (वह पढ़ेगा)।
4. लोट लकार (Imperative Mood – आज्ञा काल)
- किसी को आज्ञा (Order) देने, अनुमति (Permission) लेने या प्रार्थना करने के लिए इस लकार का प्रयोग किया जाता है।
- उदाहरण: पठतु (वह पढ़े / तुम पढ़ो)।
5. विधिलिंङ् लकार (Potential Mood – ‘चाहिए’ के अर्थ में):
- सलाह देने, कर्तव्य का बोध कराने या ‘चाहिए’ (Should/Must) के अर्थ में इस लकार का प्रयोग होता है। इसमें धातु के ऊपर ‘ए’ (े) की मात्रा लगती है।
- उदाहरण: पठेत् (उसे पढ़ना चाहिए)।
वचन और पुरुष (Vachan (Number) and Purush (Person)
Sanskrit Dhatu Roop Tricks याद करने और वाक्य बनाने के लिए पुरुष (Person) और वचन (Number) को समझना सबसे ज़रूरी है। आइए इन्हें अंग्रेज़ी (English) के व्याकरण से तुलना करके बहुत आसान तरीके से समझते हैं:
वचन (Vachana – Number)
प्रायः सभी भाषाओं में दो ही वचन (Number) होते हैं—Singular (एकवचन) और Plural (बहुवचन)। लेकिन संस्कृत में एक बहुत ही खास और अनोखा तीसरा वचन भी होता है जिसे द्विवचन कहते हैं
एकवचन (Ekavachana) = Singular Number
जब केवल एक व्यक्ति या वस्तु की बात हो, तब एकवचन का प्रयोग होता है। जैसे- बालकः (एक लड़का / One boy)।
द्विवचन (Dvivachana) = Dual Number (संस्कृत की खास विशेषता)
जहाँ दो लोगों या वस्तुओं की बात हो, वहाँ द्विवचन होता है। अंग्रेज़ी में दो के लिए भी बहुवचन यानी Plural ही इस्तेमाल होता है, लेकिन संस्कृत में दो के लिए अलग से द्विवचन होता है, जैसे- बालकौ (दो लड़के / Two boys)।
बहुवचन (Bahuvachana) = Plural Number
दो से ज़्यादा (यानी तीन या उससे अधिक) लोगों या वस्तुओं की बात होने पर बहुवचन का प्रयोग होता है। जैसे- बालकाः ( सब लड़के / All boys)।
पुरुष (Purusha – Person)
आपने अंग्रेजी में Person के बारे में पढ़ा होगा, उसे ही संस्कृत में पुरुष कहते हैं। अंतर यह है कि जहाँ अंग्रेजी में First, Second और Third Person हैं, वहीं संस्कृत में इनका क्रम थोड़ा अलग (उल्टा) लिखा जाता है। आइए मिलान करें:
प्रथम पुरुष (Prathama Purusha) = Third Person (तीसरा पर्सन)
जिसके बारे में बात की जा रही हो उसके लिए प्रथम पुरुष का प्रयोग होता है (जैसे- वह, वे दोनों, वे सब / He, She, It, They)। संस्कृत में इसके रूप ‘सह, तौ, ते’ के साथ चलते हैं।
मध्यम पुरुष (Madhyama Purusha) = Second Person (दूसरा पर्सन)
जो अंग्रेजी में Second Person है, वह संस्कृत में मध्यम पुरुष होता है। इसका उपयोग उपयोग सुनने वाले (Listener) या सामने वाले के लिए होता है (जैसे- तुम, तुम दोनों, तुम सब / You)। संस्कृत में इसके लिए ‘त्वम्, युवाम्, यूयम्’ का प्रयोग होता है।
उत्तम पुरुष (Uttama Purusha) = First Person (पहला पर्सन
इसका उपयोग खुद बात करने वाले (वक्ता) के लिए होता है (जैसे- मैं, हम दोनों, हम सब / I, We)। संस्कृत में इसके लिए ‘अहम्, आवाम्, वयम्’ का प्रयोग होता है।
परिवर्तनीय और अपरिवर्तनीय धातुएँ (कक्षा 6 के लिए विशेष)
रूप बनाने के नियम के अनुसार धातुएँ दो प्रकार की होती हैं। आइए इन्हें आसान उदाहरणों से समझते हैं:
1. अपरिवर्तनीय धातुएँ (जिनका रूप नहीं बदलता)
ये वे धातुएँ हैं जो सभी लकारों (लट्, लङ् आदि) में अपने मूल रूप में ही रहती हैं। इनमें कोई बदलाव नहीं होता। इसमें सीधे धातु में ति तः आदि प्रत्यय जोड़ दिए जाते हैं। उदाहरण –
यहाँ पठ् धातु का रूप बिना बदले सीधे ट्रिक के साथ जुड़ रहा है:
- प्रथम पुरुष: पठति (वह पढ़ता है) | पठतः (वे दो पढ़ते हैं) | पठन्ति (वे सब पढ़ते हैं)
- मध्यम पुरुष: पठसि (तुम पढ़ते हो) | पठथः (तुम दो पढ़ते हो) | पठथ (तुम सब पढ़ते हो)
- उत्तम पुरुष: पठामि (मैं पढ़ता हूँ) | पठावः (हम दो पढ़ते हैं) | पठामः (हम सब पढ़ते हैं)
अन्य उदाहरण
लिख् (लिखना): इसका रूप ‘लिखति, लिखतः, लिखन्ति’ चलता है।
चल् (चलना): इसका रूप ‘चलति, चलतः, चलन्ति’ चलता है।
हस् (हँसना): इसका रूप ‘हसति, हसतः, हसन्ति’ चलता है।
खाद् (खाना): इसका रूप ‘खादति, खादतः, खादन्ति’ चलता है।
खेल् (खेलना): इसका रूप ‘खेलति, खेलतः, खेलन्ति’ चलता है।
वद् (बोलना): इसका रूप ‘वदति, वदतः, वदन्ति’ चलता है।
नम् (नमस्कार करना): इसका रूप ‘नमति, नमतः, नमन्ति’ चलता है। (नोट: इसका रूप केवल भविष्यत काल में ‘नंस्यति’ बदलता है, वर्तमान में समान रहता है)।
2. परिवर्तनीय धातुएँ (जिनका रूप बदल जाता है)
जो धातुएँ रूप बनाते समय मूलरूप से (विशेषकर वर्तमान, भूत और लोट लकार में) बिल्कुल बदल जाती हैं, उन्हें परिवर्तनीय धातु कहते हैं। कोष्ठक (bracket) में बदला हुआ रूप दिया गया है, इसी बदले हुए रूप के पीछे ट्रिक जोड़ी जाती है। उदाहरण –
यहाँ मूल धातु गम् है, लेकिन इसका रूप बदलकर गच्छ हो जाता है और फिर ट्रिक जुड़ती है:
- प्रथम पुरुष: गच्छति (वह जाता है) | गच्छतः (वे दो जाते हैं) | गच्छन्ति (वे सब जाते हैं)
- मध्यम पुरुष: गच्छसि (तुम जाते हो) | गच्छथः (तुम दो जाते हो) | गच्छथ (तुम सब जाते हो)
- उत्तम पुरुष: गच्छामि (मैं जाता हूँ) | गच्छावः (हम दो जाते हैं) | गच्छामः (हम सब जाते हैं)
अन्य उदाहरण
पा (पिब् – पीना): मूल धातु ‘पा’ है, लेकिन रूप ‘पिबति, पिबतः, पिबन्ति’ चलता है।
स्था (तिष्ठ् – बैठना/ठहरना): मूल धातु ‘स्था’ है, लेकिन रूप ‘तिष्ठति, तिष्ठतः, तिष्ठन्ति’ चलता है।
दृश् (पश्य् – देखना): मूल धातु ‘दृश्’ है, लेकिन रूप ‘पश्यति, पश्यतः, पश्यन्ति’ चलता है।
भू (भव् – होना): मूल धातु ‘भू’ है, लेकिन रूप ‘भवति, भवतः, भवन्ति’ चलता है।
घ्रा (जिघ्र् – सूँघना): मूल धातु ‘घ्रा’ है, लेकिन रूप ‘जिघ्रति, जिघ्रतः, जिघ्रन्ति’ चलता है।
गै (गाय् – गाना): मूल धातु ‘गै’ है, लेकिन रूप ‘गायति, गायतः, गायन्ति’ चलता है।
विशेष टिप्पणी
परिवर्तनीय धातुओं का रूप केवल लट् (वर्तमान), लङ् (भूतकाल), लोट और विधिलिंग में बदलता है। लेकिन जब इनका लृट् लकार (भविष्यत काल) बनाया जाता है, तो ये वापस अपने असली (मूल) रूप में आ जाती हैं! जैसे – पा का ‘पास्यति’ और गम् का ‘गमिष्यति’ बनता है।
लकार के अनुसार धातु रूप याद करने की ट्रिक्स Sanskrit Dhatu Roop Tricks
लट् लकार (Present Tense – वर्तमान काल) की ट्रिक
किसी भी धातु (जैसे: पठ्, गम्, लिख्) के पीछे बस इस फॉर्मूले को जोड़ देना है:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | ति | तः | न्ति |
| मध्यम पुरुष | सि | थः | थ |
| उत्तम पुरुष | आमि | आवः | आमः |
उदाहरण ( पठ् धातु पढ़ना)
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
| प्रथम पुरुष | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यम पुरुष | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तम पुरुष | पठामि | पठावः | पठामः |
लङ् लकार (Past Tense – भूतकाल) की ट्रिक Sanskrit Dhatu Roop Tricks
नियम: भूतकाल (लङ् लकार) में धातु से पहले हमेशा ‘अ’ जोड़ा जाता है और धातु के बाद नीचे दी गई ट्रिक को जोड़ा जाता है।
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
| प्रथम पुरुष | त् | ताम् | न् |
| मध्यम पुरुष | ः (विसर्ग) | तम् | त् |
| उत्तम पुरुष | म् | ाव (आव) | ाम (आम) |
उदाहरण (पठ् धातु -> पढ़ना):
| एकवचन Singular | द्विवचन Dual | बहुवचन Plural | |
| प्रथम पुरुष: | अपठत् | अपठताम् | अपठन् |
| मध्यम पुरुष: | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| उत्तम पुरुष: | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
लृट् लकार (Future Tense – भविष्यत काल) की ट्रिक
नियम – भविष्यत काल की ट्रिक बिल्कुल वर्तमान काल (लट् लकार) की तरह ही होती है। मतलब अन्त उनका भी “ति तः न्ति” से होता है, बस धातु के बाद ‘स्य’ या ‘इष्य’ जुड़ जाता है।
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
| प्रथम पुरुष | िष्यति | | िष्यतः | | िष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | िष्यसि | | िष्यथः | | िष्यथ |
| उत्तम पुरुष | िष्यामि | | िष्यावः | | िष्यामः |
उदाहरण (पठ् धातु -> पढ़ना)
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
| प्रथम पुरुष: | पठिष्यति | पठिष्यतः | पठिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष: | पठिष्यसि | पठिष्यथः | पठिष्यथ |
| उत्तम पुरुष: | पठिष्यामि | पठिष्यावः | पठिष्यामः |
विशेष टिप्पणी
गम् (गच्छ) धातु का नियम: लङ् लकार (भूतकाल) में ‘गच्छ’ चलता है (जैसे: अगच्छत्), लेकिन लृट् लकार (भविष्यत काल) में मूल धातु ‘गम्’ ही रहती है (जैसे: गमिष्यति)।
लिख् धातु का नियम: लृट् लकार में यह लेखिष्यति हो जाता है (इ का ए बन जाता है)।
लोट् लकार (Imperative Mood – आज्ञा काल / प्रार्थना) की ट्रिक
नियम – इस लकार का उपयोग आज्ञा, अनुमति या प्रार्थना के लिए किया जाता है। इसमें किसी भी धातु के पीछे यह फॉर्मूला जोड़ें:
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
| प्रथम पुरुष | तु | ताम् | न्तु |
| मध्यम पुरुष | (सिर्फ मूल धातु) | तम् | त |
| उत्तम पुरुष | आनि | व (आव) | म (आम) |
नोट – मध्यम पुरुष एकवचन में कोई प्रत्यय नहीं जुड़ता, केवल मूल धातु ही रहती है।
विधिलिंङ् लकार (Potential Mood)’चाह चाहिए’ के अर्थ में) की ट्रिक
नियम: इसका उपयोग ‘चाहिए’, सलाह या योग्यता के अर्थ में होता है। इसमें धातु के आखिरी अक्षर पर ‘ए’ (े) की मात्रा लग जाती है।
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
| प्रथम पुरुष | ेत् (एत्) | ेताम् (एताम्) | ेयुः (एयुः) |
| मध्यम पुरुष | े: (एः / विसर्ग) | ेतम् (एतम्) | ेत (एत) |
| उत्तम पुरुष | ेयम् (एयम्) | ेव (एव) | ेम (एम) |
उदाहरण (पठ् धातु -> पढ़ना)
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
| प्रथम पुरुष | पठेत् | पठेताम् | पठेयुः |
| मध्यम पुरुष | पठेः | पठेतम् | पठेत |
| उत्तम पुरुष | पठेयम् | पठेव | पठेम |
निष्कर्ष (Conclusion)
संस्कृत व्याकरण में महारत हासिल करने के लिए क्रियाओं के मूल आधार को समझना अत्यंत आवश्यक है। इस लेख में हमने देखा कि कक्षा 6, 7 और 8 के स्तर पर Sanskrit dhatu roop को रटने के बजाय यदि नियमों और ट्रिक्स के माध्यम से समझा जाए, तो यह विषय बेहद आसान और रुचिकर बन जाता है। परिवर्तनीय और अपरिवर्तनीय धातुओं के सूक्ष्म अंतर को पहचानकर तथा लेख में दी गई शॉर्ट ट्रिक्स का नियमित अभ्यास करके छात्र किसी भी Sanskrit dhatu roop को बिना किसी त्रुटि के स्वयं बना सकते हैं।
यह जादुई फॉर्मूला न केवल विद्यार्थियों के मन से संस्कृत का डर दूर करेगा, बल्कि परीक्षाओं में उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा। हम आशा करते हैं कि यह मार्गदर्शिका छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।
लकारों के विषय में अक्सर पूछे जाने वाले महत्त्वपूर्ण प्रश्न
उत्तर: संस्कृत व्याकरण में कुल 10 लकार होते हैं, लेकिन स्कूली शिक्षा और सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, REET) के पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से 5 लकार ही पढ़ने होते हैं (लट्, लङ्, लृट्, लोट, और विधिलिंग)।
उत्तर: लङ् लकार की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें धातु रूप के शुरू में हमेशा ‘अ’ अक्षर जुड़ा होता है, जैसे- अपठत्, अगच्छत्, अलिखत् आदि।
उत्तर: संस्कृत व्याकरण के नियम के अनुसार, गम् धातु का रूप वर्तमान, भूत और लोट लकार में ‘गच्छ’ में बदल जाता है, लेकिन लृट् लकार (भविष्यत काल) में यह अपने मूल रूप ‘गम्’ में ही रहता है, इसलिए इसका रूप ‘गमिष्यति’ बनता है।
उत्तर: दोनों की ट्रिक लगभग एक जैसी है। अंतर सिर्फ इतना है कि लृट् लकार (भविष्यत काल) में धातु और प्रत्यय के बीच में ‘ष्य’ या ‘इष्य’ जुड़ जाता है (जैसे: पठति का पठिष्यति हो जाता है)।
उत्तर: यह ट्रिक सभी ‘परस्मैपदी’ धातुओं (जैसे- पठ्, लिख्, गम्, चल) पर 100% काम करती है। कुछ विशेष धातुओं (जैसे- दा, नम्, दृश्) में थोड़े बदलाव होते हैं जिनकी सूची ऊपर पोस्ट में दी गई है।
लकारों पर आधारित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: ‘अपठत्’ किस लकार का रूप है?
(A) लट् लकार
(B) लङ् लकार
(C) लृट् लकार
(D) लोट लकार
उत्तर यहाँ देखें
उत्तर: (B) लङ् लकार
प्रश्न 2: ‘दा’ धातु का लृट् लकार (भविष्यत काल) प्रथम पुरुष एकवचन में क्या रूप होगा?
(A) दाइष्यति
(B) ददाति
(C) दास्यति
(D) यच्छति
उत्तर के लिए यहाँ क्लिक करें
उत्तर: (C) दास्यति
प्रश्न 3: ‘पठेयुः’ किस लकार और पुरुष का रूप है?
(A) विधिलिंङ् लकार, प्रथम पुरुष (बहुवचन)
(B) लोट लकार, मध्यम पुरुष (एकवचन)
(C) लट् लकार, उत्तम पुरुष (द्विवचन)
(D) लङ् लकार, प्रथम पुरुष (एकवचन)
उत्तर के लिए यहाँ क्लिक करें
उत्तर: (A) विधिलिंग लकार, प्रथम पुरुष (बहुवचन)
प्रश्न 4: ‘नम्’ धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन में क्या रूप बनेगा?
(A) नमिष्यन्ति
(B) नंस्यन्ति
(C) नमन्ति
(D) अनमन्
उत्तर यहाँ देखें
उत्तर: (B) नंस्यन्ति
प्रश्न 5: आज्ञा या अनुमति देने के अर्थ में किस लकार का प्रयोग किया जाता है?
(A) लट् लकार
(B) लङ् लकार
(C) लोट लकार
(D) विधिलिंङ् लकार
उत्तर के लिए यहाँ क्लिक करें
उत्तर: (C) लोट लकार
10 प्रश्नों की अभ्यास कार्य पत्रिका PDF फॉर्मेट में नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके डाउनलोड करें